Bareillylive: विशिष्ट बचपन पत्रिका एवं साहित्यिक संस्था कवि गोष्ठी आयोजन समिति के संयुक्त तत्वावधान में इटौआ रोड स्थित धैर्या में भव्य सरस काव्य संध्या एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’ ने की। मुख्य अतिथि चंदौसी से पधारी कवयित्री डॉ. रीता सिंह रहीं जबकि विशिष्ट अतिथिगण साहित्यकार ज्ञान देवी सत्यम एवं डॉ. मिथिलेश राकेश उपस्थित रहे। समारोह की शुरुआत माँ शारदे के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से की गई।
समारोह में साहित्य, समाज और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कई साहित्यकारों को ‘धैर्य विशिष्ट साहित्य सम्मान’ से नवाजा गया। बरेली के वरिष्ठ साहित्यकार गणेश पथिक, डॉ. अखिलेश कुमार गुप्ता, डॉ. मिथिलेश राकेश, राम कुमार कोली व प्रवीन कुमार शर्मा को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त पीलीभीत के सत्यपाल ‘सजग’, शाहजहाँपुर के डॉ. प्रदीप बैरागी तथा चंदौसी की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. रीता सिंह को भी यह सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान स्वरूप सम्मानित साहित्यकारों को शॉल, प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। सम्मान प्रदान करने वालों में विशिष्ट बचपन पत्रिका की प्रधान संपादक राजबाला धैर्य, कार्यकारी संपादक बीना आजाद तथा कवि गोष्ठी आयोजन समिति के सचिव एडवोकेट उपमेंद्र सक्सेना प्रमुख रहे।
काव्य संध्या में नगर और आसपास के क्षेत्रों से आए अनेक कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाएँ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उपस्थित कवियों ने विविध विषयों—प्रेम, समाज, संस्कृति और मानवता—पर प्रभावशाली कविताएँ पढ़ीं और सम्मिलित दर्शकों ने तालियों व प्रशंसा से उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का संचालन प्रभावपूर्ण और गरिमामय रूप से राजबाला धैर्य ने किया, जबकि आयोजन समिति के सचिव उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट और अन्य सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही।
कार्यक्रम में संस्था के सचिव उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट के साथ डॉ. दीपक मुखर्जी ‘दीप’, शिवरक्षा पांडेय, वीर सिंह आजाद, भारतेंद्र सिंह, सुरेंद्र कुमार चौधरी, पी.के. दीवाना, डॉ. राजेश शर्मा ककरेली, बीना आजाद, मनोज दीक्षित ‘टिंकू’, राजकुमार अग्रवाल ‘राज’, सारिका शर्मा, मिलन कुमार ‘मिलन’, मनोज सक्सेना, रामधनी निर्मल, विनीता सिंह सिसोदिया, हेमपाल अनुराग, सात्विक चौधरी एवं रीतेश साहनी सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक स्नेह और आत्मीयता के साथ हुआ, जिसमें साहित्य जगत की उपलब्धियों और नवोदित प्रतिभाओं के उत्थान पर विचार-विमर्श भी किया गया।






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