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नंदीक्षा पाठशाला में भक्ति, नृत्य और मुस्कान के साथ मना जन्माष्टमी पर्व

नंदीक्षा पाठशाला में भक्ति नृत्य और मुस्कान

Bareillylive : भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के पावन अवसर पर नंदीक्षा वेलफेयर फाउंडेशन ने नंदीक्षा पाठशाला के जरूरतमंद बच्चों के साथ श्रद्धा, उत्साह और उमंग के माहौल में पर्व मनाया। आयोजन का उद्देश्य बच्चों को केवल त्योहार की खुशियों से जोड़ना ही नहीं, बल्कि उनमें संस्कार, आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता की भावना विकसित करना भी रहा।

कार्यक्रम में बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। नन्हे-मुन्ने बच्चे राधा और कृष्ण की आकर्षक एवं मनमोहक वेशभूषा में सजकर पहुंचे। किसी ने कान्हा की बांसुरी थामी तो कोई राधा के रूप में सजी दिखाई दी। बच्चों की मासूम मुस्कान, रंग-बिरंगे परिधान और उत्साह ने आयोजन स्थल को भक्तिमय एवं आनंदमय बना दिया।

जन्माष्टमी उत्सव के दौरान बच्चों ने श्रीकृष्ण भक्ति पर आधारित सुंदर नृत्य प्रस्तुतियां दीं। राधा-कृष्ण की झांकियों और भक्ति गीतों पर बच्चों के नृत्य ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में बच्चों की प्रतिभा और आत्मविश्वास देखने को मिला। फाउंडेशन से जुड़े सदस्यों ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उनकी प्रस्तुतियों की सराहना की।
इस अवसर पर कान्हा जी के नाम पर माखन थीम का विशेष केक काटा गया। केक काटने के दौरान बच्चों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। बच्चों ने एक-दूसरे को केक खिलाकर पर्व की खुशियां बांटीं।

आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आर्थिक अभाव किसी बच्चे के बचपन, प्रतिभा और खुशियों के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए।
फाउंडेशन की अध्यक्ष नंदा राणा ने कहा कि त्योहारों की वास्तविक खुशी तभी सार्थक होती है, जब समाज का हर बच्चा उसमें शामिल हो और उसके चेहरे पर मुस्कान हो। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराना आवश्यक है, लेकिन उन्हें संस्कार, प्रेम, सम्मान, आत्मविश्वास और त्योहारों की खुशियों से जोड़ना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी सत्य, कर्म, साहस और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। नंदीक्षा वेलफेयर फाउंडेशन का प्रयास है कि जरूरतमंद बच्चों के जीवन में शिक्षा के साथ खुशियों और संस्कारों के रंग भी भरे जाएं।

कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि हर बच्चे को शिक्षा, संस्कार, सम्मान और खुशियों का समान अधिकार मिले। आयोजन ने यह संदेश दिया कि किसी बच्चे के हाथ में महंगे खिलौने हों या न हों, लेकिन उसके चेहरे पर मुस्कान जरूर होनी चाहिए, क्योंकि इसी मुस्कान से एक बेहतर और संवेदनशील समाज की शुरुआत होती है।

Bareillylive : भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के पावन अवसर पर नंदीक्षा वेलफेयर फाउंडेशन ने नंदीक्षा पाठशाला के जरूरतमंद बच्चों के साथ श्रद्धा, उत्साह और उमंग के माहौल में पर्व मनाया। आयोजन का उद्देश्य बच्चों को केवल त्योहार की खुशियों से जोड़ना ही नहीं, बल्कि उनमें संस्कार, आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता की भावना विकसित करना भी रहा।

कार्यक्रम में बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। नन्हे-मुन्ने बच्चे राधा और कृष्ण की आकर्षक एवं मनमोहक वेशभूषा में सजकर पहुंचे। किसी ने कान्हा की बांसुरी थामी तो कोई राधा के रूप में सजी दिखाई दी। बच्चों की मासूम मुस्कान, रंग-बिरंगे परिधान और उत्साह ने आयोजन स्थल को भक्तिमय एवं आनंदमय बना दिया।

जन्माष्टमी उत्सव के दौरान बच्चों ने श्रीकृष्ण भक्ति पर आधारित सुंदर नृत्य प्रस्तुतियां दीं। राधा-कृष्ण की झांकियों और भक्ति गीतों पर बच्चों के नृत्य ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में बच्चों की प्रतिभा और आत्मविश्वास देखने को मिला। फाउंडेशन से जुड़े सदस्यों ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उनकी प्रस्तुतियों की सराहना की।
इस अवसर पर कान्हा जी के नाम पर माखन थीम का विशेष केक काटा गया। केक काटने के दौरान बच्चों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। बच्चों ने एक-दूसरे को केक खिलाकर पर्व की खुशियां बांटीं।

आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आर्थिक अभाव किसी बच्चे के बचपन, प्रतिभा और खुशियों के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए।
फाउंडेशन की अध्यक्ष नंदा राणा ने कहा कि त्योहारों की वास्तविक खुशी तभी सार्थक होती है, जब समाज का हर बच्चा उसमें शामिल हो और उसके चेहरे पर मुस्कान हो। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराना आवश्यक है, लेकिन उन्हें संस्कार, प्रेम, सम्मान, आत्मविश्वास और त्योहारों की खुशियों से जोड़ना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी सत्य, कर्म, साहस और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। नंदीक्षा वेलफेयर फाउंडेशन का प्रयास है कि जरूरतमंद बच्चों के जीवन में शिक्षा के साथ खुशियों और संस्कारों के रंग भी भरे जाएं।

कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि हर बच्चे को शिक्षा, संस्कार, सम्मान और खुशियों का समान अधिकार मिले। आयोजन ने यह संदेश दिया कि किसी बच्चे के हाथ में महंगे खिलौने हों या न हों, लेकिन उसके चेहरे पर मुस्कान जरूर होनी चाहिए, क्योंकि इसी मुस्कान से एक बेहतर और संवेदनशील समाज की शुरुआत होती है।

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