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कोर्ट का आदेश: बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण के बिना नहीं होगा जीएसटी पंजीकरण

कोर्ट का आदेश बायोमेट्रिक आधार

bareillylive@bareillynews:फर्जी जीएसटी पंजीकरण पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, देशभर के अधिकारियों को जारी किए निर्देश

नई दिल्ली, एजेंसी। फर्जी जीएसटी पंजीकरण के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि अब बायोमेट्रिक आधारित आधार प्रमाणीकरण के बिना किसी भी जीएसटी पंजीकरण की अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत ने यह निर्देश उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें याचिकाकर्ताओं के पैन और आधार नंबर का कथित तौर पर इस्तेमाल कर फर्जी जीएसटी पंजीकरण किए जाने का आरोप लगाया गया था।

न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति शैल जैन की पीठ ने आठ सितंबर को पारित आदेश में देशभर के संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि फर्जी पंजीकरण रोकने के लिए बायोमेट्रिक आधारित आधार प्रमाणीकरण को अनिवार्य किया जाना जरूरी है।

2023-24 में 15,085 करोड़ की कर चोरी

पीठ ने संसद में फर्जी जीएसटी पंजीकरण को लेकर दिए गए एक जवाब का हवाला देते हुए कहा कि 2023-24 में 2,800 फर्जी जीएसटी पंजीकरण के मामले सामने आए थे, जिनमें करीब 15,085 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता चला था।

वहीं, 2024-25 में 1,654 फर्जी पंजीकरण के मामले सामने आए और इनमें करीब 13,109 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता चला।

अदालत ने कहा कि पहले यह बताया गया था कि जीएसटी पंजीकरण के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य किया जाएगा, लेकिन यह व्यवस्था अब तक पूरी तरह लागू नहीं की गई है। इसके चलते चोरी किए गए अथवा निष्क्रिय पैन और आधार विवरण का इस्तेमाल कर फर्जी जीएसटी पंजीकरण किए जाने की आशंका बनी हुई है।

निर्दोष नागरिकों को भी हो रही परेशानी

अदालत ने कहा कि फर्जी जीएसटी पंजीकरण केवल सरकार के राजस्व को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि उन निर्दोष नागरिकों के लिए भी परेशानी का कारण बनते हैं, जिनके पैन और आधार विवरण का कथित तौर पर दुरुपयोग किया जाता है।

पीठ ने कहा कि अधिकारियों ने बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य करने में किसी व्यावहारिक कठिनाई को पर्याप्त रूप से प्रदर्शित नहीं किया है। इसलिए फिलहाल देशभर के सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि बायोमेट्रिक आधारित आधार प्रमाणीकरण के बिना आगे कोई जीएसटी पंजीकरण स्वीकृत न किया जाए।

22 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

अदालत ने अधिकारियों को इस व्यवस्था को लागू करने में सामने आने वाली किसी भी व्यावहारिक कठिनाई के संबंध में आपत्ति दर्ज कराने की स्वतंत्रता दी है। मामले को अगली सुनवाई के लिए 22 सितंबर को सूचीबद्ध किया गया है।

अदालत ने अपने पूर्व आदेश में भी कहा था कि 2017 में केंद्रीय माल एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम लागू होने के बाद से निर्दोष नागरिकों के पैन और आधार विवरण का इस्तेमाल कर फर्जी जीएसटी पंजीकरण किए जाने की समस्या

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