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भाजपा सरकार पर बरसे स्वामी प्रसाद मौर्य, बोले- देश बेचने में ईस्ट इंडिया कंपनी को भी पीछे छोड़ दिया

यूपी में जंगलराज का आरोप, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल; आजम खां के बचाव में उतरे, 2027 के लिए दिया ‘यूपी बचाओ-भाजपा हटाओ’ का नारा

बरेली@bareillylive:बरेली। अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने रविवार को बरेली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र की मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सरकार पर कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने, प्रदेश की कानून-व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की अनदेखी करने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता प्रभावित करने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए।

मौर्य ने आरोप लगाया कि देश की संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने के मामले में मौजूदा सरकार ने ईस्ट इंडिया कंपनी को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होने के बजाय अपने कॉरपोरेट मित्रों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। बंदरगाहों, हवाई अड्डों और एलआईसी जैसी महत्वपूर्ण संपत्तियों को अडानी समूह को सौंपे जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि देश की संपत्तियों और धरोहरों के निजीकरण का असर युवाओं के भविष्य पर पड़ेगा।

‘उत्तर प्रदेश में जंगलराज, अपराधियों को मिल रहा संरक्षण’

प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में लगातार हत्या और दुष्कर्म जैसी गंभीर घटनाएं हो रही हैं और प्रदेश अपराध की गंभीर स्थिति से गुजर रहा है।

उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में अपराधियों को जेल भेजने की कार्रवाई होती थी, जबकि मौजूदा सरकार में भाजपा से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण दिए जाने के आरोप सामने आते हैं।

‘स्कूल बंद हो रहे, गली-गली खुल रहे शराब के ठेके’

शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मौर्य ने आरोप लगाया कि गरीब और आम परिवारों के लिए शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है। उन्होंने प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के स्कूल बंद किए जाने का आरोप लगाया और कहा कि दूसरी ओर गली-गली शराब की दुकानें खोली जा रही हैं।

मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी उन्होंने सरकार के दावों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि कई स्थानों पर मरीजों को दवा और बेहतर इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

मौर्य ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता प्रभावित हुई है और वह सरकार के दबाव में काम कर रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने कहा कि Gen Z यानी युवा पीढ़ी अब बेईमानी और तानाशाही के खिलाफ सवाल पूछ रही है। उनके मुताबिक, यही जागरूकता आने वाले समय में राजनीतिक बदलाव की बड़ी ताकत बन सकती है।

आजम खां के बचाव में उतरे स्वामी प्रसाद मौर्य

सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां पर दर्ज मुकदमों को लेकर भी स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खां के खिलाफ कार्रवाई प्रतिशोध की राजनीति का हिस्सा है।

मौर्य ने कहा कि लंबे समय तक विधायक और सांसद रहे नेता के खिलाफ मुर्गी और भैंस चोरी जैसे मामलों में मुकदमे दर्ज किया जाना राजनीतिक दुर्भावना को दर्शाता है। जौहर यूनिवर्सिटी के मामले में भी उन्होंने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका दावा था कि विश्वविद्यालय की स्थापना रामपुर विकास प्राधिकरण के गठन से पहले हुई थी।

‘एक देश-एक चुनाव नहीं, एक देश-एक शिक्षा लागू करे सरकार’

‘एक देश, एक चुनाव’ के मुद्दे पर मौर्य ने कहा कि यह जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार व्यवस्था में सुधार करना चाहती है तो उसे ‘एक देश, एक शिक्षा’ की व्यवस्था लागू करनी चाहिए, जिससे गरीब और अमीर परिवारों के बच्चों को समान शिक्षा का अवसर मिल सके।

उन्होंने कहा कि केवल किसी स्थान या संस्था का नाम बदलने से दलित, पिछड़े और वंचित समाज का कल्याण नहीं हो सकता। इसके लिए शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

2027 में ‘यूपी बचाओ-भाजपा हटाओ’ का आह्वान

स्वामी प्रसाद मौर्य ने सीजेपी कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए जाने और प्रस्तावित रैली को स्थगित कराए जाने का आरोप लगाते हुए प्रशासन पर भी निशाना साधा। उन्होंने दलित, पिछड़े और मुस्लिम समाज के साथ ही सभी विपक्षी दलों से एक मंच पर आने की अपील की।

उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में ‘यूपी बचाओ-भाजपा हटाओ’ और 2029 में ‘देश बचाओ-भाजपा हटाओ’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दलों और सामाजिक समूहों की एकजुटता के जरिए संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा की जा सकती है।

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