29 अक्टूबर को रखा जाएगा करवा चौथ का निर्जला व्रत, ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा ने बताया आठ शुभ योगों का विशेष महत्व
बरेली@bareillylive:बरेली। सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला करवा चौथ का पर्व इस वर्ष 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा। पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। इस बार करवा चौथ पर लक्ष्मी नारायण राजयोग और बुधादित्य योग समेत कई शुभ ज्योतिषीय संयोग बनने की बात कही जा रही है। ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार इन योगों के कारण इस वर्ष करवा चौथ का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व विशेष रहेगा।
करवा चौथ पर आठ शुभ योगों का संयोग
ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार इस वर्ष करवा चौथ पर लक्ष्मी नारायण राजयोग, बुधादित्य योग, त्रिग्रही योग, शुक्रादित्य योग, रोहिणी नक्षत्र, परिधि योग, गौरी योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग बताया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त वृषभ राशि में चंद्रमा के गोचर को भी ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसे संयोग में व्रत और पूजा-अर्चना करने से सौभाग्य, सुख-समृद्धि तथा दांपत्य जीवन में मधुरता की प्राप्ति होती है।
29 अक्टूबर को रखा जाएगा करवा चौथ का व्रत
आचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के आधार पर 29 अक्टूबर को करवा चौथ मनाया जाएगा। इस दिन विवाहित महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करने के बाद निर्जला व्रत का संकल्प लेंगी।
दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को भगवान गणेश, माता गौरी और करवा माता की विधि-विधान से पूजा की जाएगी। इसके बाद रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा।
करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार इस वर्ष करवा चौथ पर पूजा और व्रत के प्रमुख समय इस प्रकार बताए गए हैं।
- करवा चौथ: 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार
- सरगी का समय: प्रातः 3:30 से 5:30 बजे तक
- सूर्योदय: प्रातः 6:22 बजे
- पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:38 से 6:56 बजे तक
- संभावित चंद्रोदय: रात 8:04 से 8:17 बजे के बीच
- व्रत पारण: चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद
चंद्रोदय का समय स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए महिलाओं को स्थानीय पंचांग के अनुसार चंद्र दर्शन का सही समय सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है।
करवा चौथ पर नहीं रहेगा भद्रा का साया
ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार इस बार करवा चौथ के प्रमुख पूजन काल में भद्रा का प्रभाव नहीं रहने की बात कही गई है। ऐसे में महिलाएं निर्धारित शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना कर सकेंगी।
उन्होंने बताया कि करवा चौथ पर श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व है। महिलाएं व्रत कथा सुनने के साथ करवा माता और भगवान गणेश से परिवार की सुख-समृद्धि तथा पति की दीर्घायु की कामना करती हैं।
सरगी से होती है व्रत की शुरुआत
करवा चौथ पर सरगी की परंपरा का विशेष महत्व है। परंपरागत रूप से सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं।
महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं और इसके बाद निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं। शाम को सोलह शृंगार करके पूजा-अर्चना की जाती है। चंद्रमा निकलने के बाद महिलाएं छलनी से चंद्र दर्शन करती हैं और अर्घ्य देकर पति की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं।
करवा चौथ का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में करवा चौथ को अखंड सौभाग्य और दांपत्य प्रेम का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत से पति की दीर्घायु, परिवार की खुशहाली और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना की जाती है।
धार्मिक ग्रंथों में करक व्रत का उल्लेख मिलता है। इस दिन भगवान गणेश, माता गौरी और चंद्रदेव की आराधना की परंपरा है।
ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि करवा चौथ केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी है। उन्होंने महिलाओं से स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय देखकर पूजा एवं व्रत पारण करने की अपील की।



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