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CBSE Exam-2020 Cancelled : सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की बची हुई परीक्षाएं रद्द, सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी

नई दिल्ली।(CBSE Exam-2020 Cancelled) केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) ने 1 से 15 जुलाई 2020 के बीच होने वाली 10वीं और 12वीं की बची हुई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट में इन परीक्षाओँ के आयोजन को लेकर दायर याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह जानकारी दी। साथ ही ये भी बताया है कि अब किस आधार पर छात्र-छात्राओं को अंक दिए जाएंगे और रिजल्ट तैयार किए जाएंगे।  मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही थी।

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के मामले के बाद आईसीएसई बोर्ड परीक्षा की सुनवाई शुरु हुई जिसे कल सुबह 10.30 बजे तक के लिए टाल दिया गया है। अब शुक्रवार की सुबह होने वाली सुनवाई में न सिर्फ आईसीएसई बोर्ड की परीक्षाओं के मामले में सुनवाई पूरी होगी, बल्कि सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाओं के बारे में भी बोर्ड के अंतिम निर्णय की औपचारिक रूप से घोषणा की जाएगी।

किस आधार पर होगी मार्किंग

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ बैठक में बोर्ड के अधिकारियों ने कहा था कि 10वीं कक्षा का इंटरनल असेसमेंट से रिजल्ट तैयार करना आसान है लेकिन 12वीं कक्षा के मामले में इस तरह रिजल्ट तैयार करने में दिक्कत आएगी क्योंकि 12वीं कक्षा के आधार पर आईआईटी, मेडिकल समेत कई अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला होता है। विद्यालय के इंटरनल असेसमेंट में कई होनहार छात्र भी पीछे हो सकते हैं।

इसलिए बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि कक्षा 12वीं के छात्र-छात्राओँ को दो विकल्प दिए जाएंगे। उन्हें स्कूल में हुए पिछली तीन परीक्षाओं में उनके परफॉर्मेंस के आधार पर अंक दिए जाएंगे। इसके अलावा उन्हें कुछ महीने बाद होने वाली इंप्रूवमेंट परीक्षा में शामिल होने का भी विकल्प दिया जाएगा। छात्र-छात्राएं चाहें तो इंप्रूवमेंट परीक्षा देकर अपना स्कोर बेहतर कर सकेंगे।

गौरतलब है कि फरवरी-मार्च में चल रही परीक्षाएं कोरोना वायरस महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थीं। फिर सीबीएसई ने 1 जुलाई से लेकर 15 जुलाई तक परीक्षाएं कराए जाने की बात कही थी। इसके लिए विस्तृत डेटशीट भी जारी कर दी गई थी। लेकिन, कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गईं कि परीक्षाएं रद्द की जाएं। कई राज्य सरकारें भी इस पक्ष में थीं।

याचिकाओं में कहा गया था कि एम्स (AIIMS) के डाटा के अनुसार, कोरोना वायरस आने वाले समय में भारत में अपने चरम पर होगा। ऐसे में परीक्षाओं को रद्द कर दिया जाना चाहिए।

सीबीएसई और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा। वहीं, दिल्ली, ओडिशा और महाराष्ट्र सरकार की ओर से परीक्षा न कराए जाने की याचिकाओं पर वकील ऋषि मल्होत्रा ने दलीलें पेश कीं।

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