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बच्ची की दुष्कर्म का बाद हत्या करने वाले को 7 महीने के भीतर फांसी की सजा

जौनपुर। बच्ची के साथ दुष्कर्म और गला दबाकर हत्या के बाद शव को तेजाब डाल कर जलाने के मामले में पॉक्सो अदालत ने दोषी को इस जघन्य वारदात के 7 महीने के अंदर फांसी की सजा सुनाई है। यह वारदात 6 अगस्त, 2020 को मड़ियाहूं थाना क्षेत्र में हुई थी।

अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम रवि यादव ने  इस मामले में बाल गोविंद को दोषी ठहराते हुए मृत्यु दंड के साथ ही 10000 रुपये जुर्माने का यह फैसला सोमवार को सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश ने शनिवार को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था। इस मामले की प्रतिदिन सुनवाई चली और मुकदमे की मॉनिटरिंग शासन से की जा रही थी। घटना की एफआइआर बालिका के पिता ने दर्ज कराई थी।

अभियोजन के अनुसार ईंट भट्ठे पर काम करने वाला चंदौली निवासी बाल गोविंद उर्फ गोविंदा अपने ससुराल मड़ियाहूं में रहता था। 6 अगस्त, 2020 की रात उसने 11 वर्षीय बालिका व उसकी बहन को एक दुकान से टॉफी-बिस्किट दिलाए। इसके बाद छोटी बहन को घर भेज दिया और बड़ी बहन को बहला-फुसलाकर मक्के के खेत में ले जाकर दुष्कर्म किया। इसके बाद गला व मुंह दबाकर हत्या कर दी। शव की पहचान न होने पाये, इसके लिए चेहरे पर एसिड डालकर जला दिया। इसके बाद शव को खेत में छिपाकर फरार गया। उधर छोटी बहन द्वारा घर वालों को जानकारी दिए जाने पर उन्होंने खोजबीन शुरू की। दो दिन बाद गांव वालों ने बताया कि बालिका का शव खेत में पड़ा है। पोस्टमॉर्टम में दुष्कर्म और सांस रुकने से मौत की पुष्टि हुई।

पुलिस ने बाल गोविंद को चंदौली से गिरफ्तार कर अदालत में आरोप-पत्र पेश किया। बीते 26 नवंबर, 2020 को आरोप तय हुए। मृत बालिका की छोटी बहन व जिस दुकान से बाल गोविंद ने टॉफी-बिस्किट खरीदे थे, उऩ्होंने अदालत में आरोपित का नाम लेते हुए गवाही दी। विशेष लोक अभियोजक राजेश उपाध्याय और एडीजीसी वीरेंद्र मौर्य ने 11 गवाह पेश किया। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपित को अपहरण, दुष्कर्म, हत्या, साक्ष्य छिपाने और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में दोषी करार दिया।

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