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एसआरएमएस रिद्धिमा में अमृत मंथन: भरतनाट्यम की दिखी भव्य झलक

Bareillylive : सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करने वाले भरतनाट्यम कार्यक्रम ‘अमृत मंथन’ का भव्य आयोजन एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार शाम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम ने न केवल स्थानीय दर्शकों को भरपूर मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि भरतनाट्यम की पारंपरिक कला को नई पीढ़ी के सामने जीवंत कर दिया। गुरुओं और विद्यार्थियों की संयुक्त प्रस्तुतियों ने मंच को अमृत तुल्य बना दिया, जहां हर मुद्रा और ताल ने भक्तिरस से ओतप्रोत वातावरण तैयार किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भरतनाट्यम की प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने ‘भैरवाष्टकम’ पर की। आद्या, मेहर, अवंतिका, अनिका, अनंशी, चिरन्य, मायरा, पायरा, वंदिगी, राध्या, आन्वी, भव्या, सान्वी, संस्कृति, अनुरिति, साव्या, अक्षिता, प्राग्वी और शाम्भवी ने अपनी सामूहिक नृत्य प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन युवा कलाकारों ने अपनी सधी-सुथरी अंग मुद्राओं, नेत्र अभिनय और तालबद्ध चालों से भगवान भैरव की भक्ति को जीवंत किया, जिसकी खूब तालियां बजीं।

इसके बाद विद्यार्थियों ने ‘अष्टलिंगम’, ‘तन्तवम शिव शिव शंकर’, ‘चंद्रचूड’ और बंगाली गीत ‘आछे जामाई दिगंबर’ पर अपनी नृत्य कला का अद्भुत प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों में शिव भक्ति का भाव इतना गहन था कि दर्शक भावविभोर हो उठे। कार्यक्रम को और भी यादगार बनाने के लिए प्रमुख भरतनाट्यम गुरु रोबिन ए और तनया भट्टाचार्य मंच पर उतरे। रोबिन ए ने ‘अर्धनारीश्वर’ पर अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसमें शिव-पार्वती के संयोजन को बखूबी दर्शाया। वहीं, तनया भट्टाचार्य ने ‘शिव सदाक्षरा स्रोतम’ पर नृत्य कर विद्यार्थियों को प्रेरित किया। दोनों गुरुओं की प्रस्तुतियों ने न केवल दर्शकों को तालियों के ग्रस्त किया, बल्कि युवाओं को कला सीखने के कीमती सबक भी दिए।

कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. आशीष कुमार और दीपाली सक्सेना ने किया, जिनकी मनमोहक वाणी ने पूरे आयोजन को जीवंत रखा। इस अवसर पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चेयरमैन देव मूर्ति, आशा मूर्ति, आदित्य मूर्ति, ऋचा मूर्ति, देविशा मूर्ति, उषा गुप्ता, डॉ. रजनी अग्रवाल, डॉ. प्रभाकर गुप्ता, डॉ. अनुज कुमार, डॉ. शैलेश सक्सेना सहित शहर के गण्यमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने कलाकारों को आशीर्वाद दिया और ऐसे आयोजनों की सराहना की। यह कार्यक्रम न केवल सांस्कृतिक उत्सव था, बल्कि युवाओं में पारंपरिक नृत्य कला को जागृत करने का माध्यम भी साबित हुआ। एसआरएमएस ट्रस्ट द्वारा ऐसे प्रयास स्थानीय समुदाय को गौरवान्वित कर रहे हैं।

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