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मरीजों के उपचार में नैतिक मूल्यों का ध्यान जरूरी

मरीजों के उपचार में नैतिक मूल्यों का ध्यान जरूरी

bareillylive@bareillynews:एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में दो दिवसीय कोलोप्रोक्टोलॉजी कांफ्रेंस एवं ट्रेनिंग वर्कशॉप शुरू, डॉ. आईएस तोमर और डॉ. लालता प्रसाद सम्मानित

क्रॉसर:
आधुनिक टेक्नोलॉजी को अपनाकर सेवा के जुनून के साथ मरीजों के उपचार को आगे आए चिकित्सकों की युवा पीढ़ी: देव मूर्ति
डॉ. आईएस तोमर ने दिया नैतिक मूल्यों से मानवता की सेवा का संदेश, बोले- धन नहीं, प्रतिदिन सुनें अंतरात्मा की आवाज

बरेली। सर्जरी के क्षेत्र में विशिष्ट सेवाओं के लिए बरेली के वरिष्ठ सर्जन एवं पूर्व महापौर डॉ. आईएस तोमर और वरिष्ठ आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सक डॉ. लालता प्रसाद को एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय कोलोप्रोक्टोलॉजी कांफ्रेंस एवं ट्रेनिंग वर्कशॉप के पहले दिन लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चेयरमैन देव मूर्ति ने दोनों चिकित्सकों को सम्मानित करते हुए युवा चिकित्सकों से उनके सेवा भाव, जुनून और नैतिक मूल्यों से सीख लेने का आह्वान किया।

देव मूर्ति ने कहा कि मरीजों के उपचार में अत्याधुनिक तकनीक को अपनाना जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण नैतिक मूल्यों का पालन करना है। उन्होंने कहा कि युवा चिकित्सक आधुनिक तकनीक के साथ सेवा के जुनून को अपनाकर मरीजों के उपचार के लिए आगे आएं।

डॉ. तोमर ने अंतरात्मा की आवाज सुनने का दिया संदेश

सम्मान के बाद डॉ. आईएस तोमर ने एसआरएमएस ट्रस्ट का आभार जताते हुए कहा कि देव मूर्ति और उन्होंने एक-दूसरे को आगे बढ़ते देखा है और अच्छे-बुरे समय में साथ दिया है। उन्होंने कहा कि देव मूर्ति के परिश्रम से आज एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज ने देश में विशिष्ट स्थान बनाया है, जो बरेली के लिए गर्व की बात है।

डॉ. तोमर ने अपने चिकित्सा जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब उन्होंने 1972 में एमएस करने के बाद प्रैक्टिस शुरू की थी, तब चिकित्सा सुविधाएं सीमित थीं। मरीज के क्लिनिकल आकलन के लिए एक्स-रे के अलावा बहुत कम संसाधन उपलब्ध थे। इसके बावजूद उन्होंने उपचार जारी रखा और अब तक 65 हजार से अधिक सर्जरी प्रोसीजर किए हैं।

उन्होंने कहा कि पूरे चिकित्सा जीवन में एक बात का विशेष ध्यान रखा कि मरीज का उपचार करते समय नैतिक मूल्यों को न छोड़ा जाए। समय और समाज बदलने के साथ नैतिक मूल्यों में भी बदलाव आया है, लेकिन मानवता की सेवा में इनका महत्व आज भी कायम है।

डॉ. तोमर ने युवा चिकित्सकों से कहा कि उपचार के दौरान धन से अधिक मरीज के हित को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि यदि कभी निर्णय को लेकर असमंजस हो तो अंतरात्मा की आवाज सुनें, क्योंकि नैतिक मूल्यों से जुड़ी अंतरात्मा सही रास्ता दिखाती है। उन्होंने युवा चिकित्सकों को प्रतिदिन कुछ समय आत्ममंथन के लिए निकालने का संदेश दिया।

दो दिवसीय कांफ्रेंस में विशेषज्ञों ने साझा किया ज्ञान

एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के जनरल, लेप्रोस्कोपिक एवं रोबोटिक सर्जरी विभाग की ओर से एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया के बरेली चैप्टर के सहयोग से शनिवार, 12 सितंबर 2026 को दो दिवसीय कोलोप्रोक्टोलॉजी कांफ्रेंस एवं ट्रेनिंग वर्कशॉप की शुरुआत हुई।

उद्घाटन सत्र में दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना और संस्थान गीत के बाद वैज्ञानिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। पहले दिन कुल 11 सत्र हुए, जिनमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कोलोप्रोक्टोलॉजी और आधुनिक सर्जरी से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए।

इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ कोलोप्रोक्टोलॉजी (आईएससीपी) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. प्रशांत रहाटे ने आयोजन समिति को शुभकामनाएं दीं। आईएससीपी के सचिव डॉ. नीरज गोयल ने कहा कि संस्था का उद्देश्य सही जानकारी और ज्ञान को अधिक से अधिक चिकित्सकों तक पहुंचाना है।

आईएससीपी के एकेडमिक कन्वीनर डॉ. दिनेश शाह ने कहा कि दो दिवसीय कांफ्रेंस का मुख्य उद्देश्य सीखना और सिखाना है। आधुनिक सर्जिकल प्रक्रियाओं के साथ नई तकनीक की जानकारी होना बेहतर उपचार के लिए आवश्यक है।

आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रवीश अग्रवाल ने एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज को उत्तर भारत का प्रीमियम मेडिकल कॉलेज बताते हुए चिकित्सकों के बीच ज्ञान साझा करने और लगातार सीखते रहने पर जोर दिया।

एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया के बरेली चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. कौशल कुमार ने कहा कि वरिष्ठ चिकित्सकों से सीखने और उनके साथ विमर्श करने से चिकित्सा ज्ञान का विस्तार होता है।

एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) डॉ. एमएस बुटोला ने संस्थान में उपलब्ध ऑक्सीजन थेरेपी, रोबोटिक सर्जरी समेत विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी दी।

कार्यक्रम के चेयरमैन एवं जनरल, लेप्रोस्कोपिक एवं रोबोटिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. एसके सागर ने अतिथियों का स्वागत किया। सेक्रेटरी एवं एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया के बरेली चैप्टर के ट्रेजरार डॉ. अमित सिंह ने आभार जताया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. शिवांगी मिधा ने किया।

इस अवसर पर एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर आदित्य मूर्ति, आईएससीपी के ट्रेजरार डॉ. जितेन चौधरी, एएसआई बरेली चैप्टर के सेक्रेटरी डॉ. सुजॉय मुखर्जी, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आरपी सिंह, वाइस प्रिंसिपल डॉ. रोहित शर्मा, डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. सीएम चतुर्वेदी, डीएसडब्ल्यू डॉ. क्रांति कुमार, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, फैकल्टी, डेलीगेट्स और पीजी विद्यार्थी मौजूद रहे।

साइंटिफिक प्रोग्राम में 11 सत्रों में विशेषज्ञों ने दिए व्याख्यान

वैज्ञानिक कार्यक्रम के 11 सत्रों में प्रॉक्टोलॉजी की मूल बातें, एनोरेक्टल सर्जिकल एनाटॉमी, एनल कैनाल मैपिंग, लोकल एनेस्थीसिया, पेरिएनल अल्ट्रासाउंड, फिस्टुलोग्राफी में एमआरआई की भूमिका, बवासीर, एनल फिशर, कोलोनोस्कोपी, फिस्टुला और फोड़ा, पाइलोनाइडल साइनस, पेल्विक फ्लोर डिसऑर्डर और रोबोटिक सर्जरी जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने लेजर सर्जरी, न्यूनतम इनवेसिव तकनीक, फिस्टुला के आधुनिक उपचार, हेमरॉयडेक्टमी, स्फिंक्टरोटॉमी, कोलोनोस्कोपी के लाइव प्रदर्शन और विभिन्न आधुनिक सर्जिकल प्रक्रियाओं की जानकारी साझा की।

इनसेट: वैज्ञानिक कार्यक्रम में ये चिकित्सक रहे चेयरमैन

वैज्ञानिक कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में डॉ. शुभांशु गुप्ता, डॉ. गीता कार्की, डॉ. अयूब अंसारी, डॉ. अंकुर बंसल, डॉ. अजय भारती, डॉ. पीके सचान, डॉ. मनीष टंडन, डॉ. शरद सेठ, डॉ. केएस साही, डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. एसके निगम, डॉ. शिवम गुप्ता, डॉ. रजनीश वार्ष्णेय, डॉ. ब्रज बिहारी अग्रवाल, डॉ. डीएस मलिक, डॉ. कौशल कुमार, डॉ. अनिल नेगी, डॉ. एनके सिंह, डॉ. दिनेश शाह, डॉ. अशोक सिंह, डॉ. विनोद सिंह, डॉ. अक्षय अकुलवार, डॉ. हेमंत नौटियाल, डॉ. करतार सिंह यादव, डॉ. दुष्यंत गुप्ता, डॉ. हरीश गौड़ा, डॉ. शलभ गुप्ता, डॉ. जसविंदर गिल और डॉ. वीपी सिंह चेयरपर्सन के रूप में शामिल हुए।

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