बरेली : रसोई गैस की किल्लत अब और गहराने लगी है. अभी कुछ दिन पहले तक बुकिंग के अगले दिन ही सिलेंडर की आपूर्ति उपभोत्ताओं को मिल जा रही थी, अब इसके लिए कम से कम पांच दिन प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है।इसका फायदा उठाकर कालाबाजारी करने वालों ने भी रेट हाई कर दिये हैं।गैस एजेंसी का कारिंदा कालाबाजारी के लिए परेशान उपभोक्ताओं को ही जिम्मेदार ठहरा रहा है।
खाड़ी के युद्ध ने प्राकृतिक ईंधन का ऐसा संकट पैदा कर दिया है कि लोग कमाने से ज्यादा खाना पकाने की चिंता में अधमरा हुए जा रहे है। शहरी इलाकों में घरों से मिट्टी के चूल्हे खत्म हो चुके हैं, मिट्टी तेल भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आम नागरिकों के पास एकमात्र विकल्प गैस ही बची है। इसके लिए भी मारामारी मची हुई है।
शहर की रुहेलखंड गैस एजेंसी से जुड़े उपभोक्ताओं को बुकिंग के तीसरे दिन भी एलपीजी की आपूर्ति नहीं मिली तो एजेंसी पर संपर्क साधा गया , पता चला कि अभी तक बुकिंग की ही रोस्टिंग थी, अब आपूर्ति की भी रोस्टिंग शुरू हो गई है।
रुहेलखंड गैस एजेंसी के मैनेजर बबलू श्रीवातव ने बताया कि गाड़ी ही तीन-तीन दिन बाद आ रही है।ऐसे में बुकिंग के अगले दिन आपूर्ति कैसे संभव हो सकेगी?.इसीलिए आमद के हिसाब से ही आपूर्ति की प्रतीक्षा पांच दिन तक तय की गई है। यह व्यवस्था किसके आदेश पर की गई और सूचना प्रॉपर उपभोक्ताओं को क्यों नही दी गई, इस बाबत कुछ नहीं बताया गया. आम शिकायत है कि ब्लेक में इस समय गैस 200 रुपये किलो आसानी से उपलब्ध है तो इसके लिए बबलू श्रीवास्तव ने परेशान उपभोक्ताओं को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। जबकि उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसी के वैंडर अक्सर गैस बेचने वालों की दुकानों पर गैस खिचवाने के लिए सिलेंडर उतारते देखे जा सकते है।
अखिलेश सक्सेना की रिपोर्ट






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