बरेली में जुलूस-ए-मोहम्मदी की पहली शुरुआत सिरौली से, 1980 में निकला था ऐतिहासिक जुलूस

बरेली में जुलूस-ए-मोहम्मदी की पहली

bareillylive@bareillynews:सिरौली। ईद-मिलादुन्नबी के मौके पर निकलने वाले जुलूस-ए-मोहम्मदी की बरेली जनपद में शुरुआत कस्बा सिरौली से होने का दावा किया जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, फरवरी 1980 में सिरौली से जिले का पहला जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया था। उस समय यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की मिसाल बना था।

सिरौली स्थित मदरसा गुलिस्ताने शाहजी के संस्थापक स्वर्गीय हाफिज कारी नजीर अहमद शेरी और उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत स्वर्गीय मुनव्वर अली उर्फ डॉक्टर साहब ने जिला प्रशासन से अनुमति लेकर जुलूस का आयोजन कराया था। 10 फरवरी 1980 को शुक्रवार के दिन मोहल्ला प्याज से जुलूस की शुरुआत हुई। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। जुलूस में नात-ख्वानी और नारों के साथ पैगंबर हजरत मोहम्मद ﷺ के प्रति अकीदत का इजहार किया गया।

हर वर्ग के लोग हुए थे शामिल

स्थानीय लोगों के अनुसार, जुलूस में मुस्लिम समुदाय के साथ अन्य समुदायों के लोग भी शामिल हुए थे। आयोजकों ने सभी वर्गों को आमंत्रित कर सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया था। प्रशासन की अनुमति से शांतिपूर्ण ढंग से निकला यह जुलूस सिरौली में एक नई परंपरा की शुरुआत बना।

बताया जाता है कि बरेली शहर में जुलूस-ए-मोहम्मदी की शुरुआत इसके अगले वर्ष 1981 में हुई। इस लिहाज से सिरौली को जिले में इस परंपरा की शुरुआत करने वाला कस्बा माना जाता है।

आज भी जारी है परंपरा

करीब चार दशक से अधिक समय बाद भी सिरौली में जुलूस-ए-मोहम्मदी की परंपरा जारी है। हर वर्ष ईद-मिलादुन्नबी के अवसर पर सजाए गए वाहनों, झांकियों और नात-ख्वानी के बीच जुलूस निकाला जाता है। बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होकर पैगंबर हजरत मोहम्मद ﷺ के प्रति अपनी अकीदत का इजहार करते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि 1980 में शुरू हुआ यह जुलूस आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। स्वर्गीय हाफिज कारी नजीर अहमद शेरी और स्वर्गीय मुनव्वर अली के प्रयासों से शुरू हुई यह परंपरा समय के साथ और मजबूत हुई है।

मोहल्ला प्याज से शुरू हुआ वह पहला जुलूस आज सिरौली की धार्मिक और सामाजिक विरासत का हिस्सा बन चुका है। स्थानीय लोगों के लिए 1980 का वह दिन आज भी खास है, जब पहली बार जुलूस-ए-मोहम्मदी के जरिए धार्मिक आस्था के साथ भाईचारे और एकता का संदेश पूरे कस्बे में गूंजा था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!