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लाखों अकीदतमंदों ने पेशवा-ए-आला हज़रत की बारगाह में पेश किया खिराज-ए-अकीदत

bareillylive@bareillynews:उर्स-ए-रज़वी के आखिरी दिन कुल शरीफ की रस्म अदा, देश-विदेश से पहुंचे उलेमा और अकीदतमंद

बरेली। उर्स-ए-रज़वी के आखिरी दिन शनिवार को लाखों सुन्नी-सूफी अकीदतमंदों ने अपने पेशवा व मोहसिन आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान फाज़िले बरेलवी की बारगाह में खिराज-ए-अकीदत पेश किया। उर्स के दौरान देश-विदेश से आए सज्जादगान और नामवर उलेमा ने इस्लाम, पैगंबर-ए-इस्लाम की तालीमात और मसलक-ए-आला हज़रत के मिशन पर विस्तार से रोशनी डाली। सभी कार्यक्रम दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती, सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां की सदारत और सय्यद आसिफ मियां की देखरेख में आयोजित हुए।

सुबह आठ बजे महफिल का आगाज तिलावत-ए-कुरान से हुआ। इसके बाद उलेमा की तकरीरों का सिलसिला शुरू हुआ, जो दोपहर 2 बजकर 38 मिनट तक चला। ठीक 2 बजकर 38 मिनट पर कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। फातिहा कारी रज़ा-ए-रसूल, मौलाना बशीर उल क़ादरी और मुफ्ती ज़ईम रज़ा ने पढ़ी। इसके बाद सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां और नबीरे आला हज़रत मौलाना तौसीफ रज़ा ने मुल्क समेत पूरी दुनिया में अमन-ओ-सुकून, कौम-ओ-मिल्लत की सलामती और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की।

मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि उर्स में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की। नबीरे आला हज़रत मुफ्ती अर्सलान रज़ा क़ादरी (अर्सलान मियां) ने कहा कि बरेली से दीन और सुन्नियत की खिदमत का सिलसिला आला हज़रत के दादा मुफ्ती रज़ा अली खान के दौर से चला आ रहा है। उन्होंने कहा कि मसलक-ए-आला हज़रत कोई नया मसलक नहीं, बल्कि सदियों पुराने दीन की सही समझ और उसकी पैरवी का नाम है। उन्होंने अहले सुन्नत का पैगाम मोहब्बत बताते हुए इसे आम करने की अपील की।

नबीरे आला हज़रत मुफ्ती फैज़ मियां ने कहा कि आला हज़रत का खानदान करीब दो सदियों से मजहब और मसलक की खिदमत करता आ रहा है। उन्होंने बताया कि मुफ्ती रज़ा अली खान ने अंग्रेजों के खिलाफ फतवा दिया था और आला हज़रत के बाद हुज्जतुल इस्लाम, मुफ्ती-ए-आज़म हिंद और उनके खानदान ने इस मिशन को आगे बढ़ाया।

कारी यूसुफ रज़ा संभली ने उर्स का संचालन करते हुए कहा कि उलेमा इस्लाम की सही तस्वीर और नबी-ए-करीम की तालीमात को आम करें। उन्होंने मुसलमानों से गाना-बजाना और डीजे से बचने की अपील की।

मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने ईद मिलादुन्नबी के संदर्भ में कहा कि मुसलमान अपने घरों पर झंडे लगा सकते हैं, लेकिन ऐसे झंडों से बचना चाहिए जो किसी दूसरे देश के राष्ट्रीय ध्वज से मिलते-जुलते हों। उन्होंने भारतीय तिरंगे में किसी भी तरह की रद्दोबदल को कानूनन गलत बताते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश में आपसी सौहार्द कायम रखते हुए सभी समुदायों को मुल्क की तरक्की और खुशहाली के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

इस दौरान मुफ्ती आकिल रज़वी द्वारा उर्दू में किए गए सही बुखारी के अनुवाद इमदादुल कारी की ग्यारहवीं जिल्द का विमोचन दरगाह प्रमुख ने किया। मुफ्ती आकिल रज़वी ने कहा कि बरेली सिर्फ बरेलवियों का नहीं, बल्कि उन तमाम सुन्नी खानकाहों का मरकज है जो सुन्नियत की खिदमत कर रही हैं। मुफ्ती इमरान हनफी ने आला हज़रत के इल्मी कारनामों को दुनिया के लिए मिसाल बताया।

अल्लामा तौसीफ रज़ा मिस्बाही और मौलाना साजिद रज़ा ने मुस्लिम समाज में शिक्षा की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज की तरक्की और सुरक्षा के लिए शिक्षा बेहद जरूरी है। अभिभावकों से बच्चों को बेहतर तालीम दिलाने और उन्हें आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर बनाने की अपील की गई।

मौलाना जाहिद रज़ा ने संपन्न मुसलमानों से जरूरतमंदों की मदद करने की अपील की। मुफ्ती ज़ईम रज़ा ने नमाज की पाबंदी और इश्क-ए-रसूल पर कायम रहने का संदेश दिया। कश्मीर से आए मौलाना फारूक नक्शबंदी और मौलाना मुख्तार बहेड़वी ने सोशल मीडिया के बजाय विश्वसनीय इस्लामी किताबों और उलेमा से दीन सीखने की अपील की। उन्होंने बिना दहेज के निकाह और समाज में अमन-ओ-सुकून बनाए रखने पर जोर दिया।

मौलाना ज़िक्रुल्लाह ने मां-बाप की खिदमत और फरमाबरदारी को जरूरी बताते हुए कहा कि उनकी सेवा और सम्मान हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। मुफ्ती अय्यूब खान ने नमाज से संबंधित धार्मिक मसाइल पर चर्चा की, जबकि मुफ्ती जिलानी ने मुस्लिम समाज में जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी की जरूरत पर जोर दिया। कारी इकबाल मुरादाबादी ने डीजे और शादियों में बढ़ती फिजूलखर्ची से बचने की अपील की।

उर्स के दौरान नात-ओ-मनकबत की महफिल भी सजी रही। नबीरे आला हज़रत सुल्तान रज़ा खान, नूरी मियां मुंबई समेत महशर बरेलवी, सैफुल्लाह सुल्तानी, आसिफ रज़ा वास्ती, मौलाना अर्सलान रज़ा, मौलाना ताहिर रज़ा रामपुरी, मौलाना आरिफ अशरफी, कारी रज़ा-ए-रसूल, मोअज्जम सुब्हानी और मौलाना अनीस-उर-रहमान ने नात-ओ-मनकबत पेश की।

इस मौके पर खानकाहे तहसीनिया के सज्जादानशीन हज़रत मौलाना हस्सान रज़ा खान, नबीरे आला हज़रत अहसान रज़ा, शीरान रज़ा खान, मोअज्जम रज़ा खान, जुबैर रज़ा खान, सय्यद मुस्तफा मियां, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष हाफिज नूर अहमद अजहरी, दरगाह शाहदाना वली के प्रबंधक अब्दुल वाजिद नूरी सहित बड़ी संख्या में उलेमा और शोहरा मौजूद रहे।

उर्स की व्यवस्थाओं को सफल बनाने में राशिद अली खान, हाजी जावेद खान, शाहिद नूरी, अजमल नूरी, परवेज नूरी, नासिर कुरैशी, औरंगजेब नूरी, ताहिर अल्वी, मंजूर रज़ा, मुजाहिद बेग, जुबैर रज़ा, शान रज़ा, इशरत नूरी, अब्दुल माजिद, सय्यद माजिद, युनुस गद्दी, इरशाद रज़ा, आसिफ रज़ा, सऊद रज़ा, सुहैल रज़ा, रोमान खान, हाजी अब्बास नूरी, हाजी शरिक नूरी, सय्यद एजाज़, अशमीर रज़ा, साकिब रज़ा, मोहसिन रज़ा, रेहान कुरैशी, जुनैद मिर्जा, ग़ज़ाली रज़ा, सबलू अल्वी, सय्यद जुल्फी, नफीस खान, नावेद रज़ा, जावेद खान, साजिद नूरी, हाजी फय्याज, हाजी अज़हर बेग, हाजी शकील नूरी, नईम रज़ा, अकील नूरी, हस्सान रज़ा, हसन बरेलवी, समी रज़ा, गौहर खान, अजमल रज़ा, शरिक बरकाती, मुस्तकीम नूरी, फारूक खान, सरताज बाबा, सय्यद फरहत, युनुस साबरी, खालिद नूरी, आदिल रज़ा, शाद रज़ा, अरवाज़ रज़ा, हसीन खान, सैफ खान और नाजिम रज़ा आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उर्स-ए-रज़वी के सकुशल संपन्न होने पर दरगाह के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां और सय्यद आसिफ मियां ने जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, रेलवे, नगर निगम, मीडिया, नागरिक सुरक्षा संगठन, सभी लंगर एवं सबील कमेटियों, रजाकारों, टीटीएस वालंटियर्स और रज़ा फोर्स समेत उर्स में सहयोग करने वाले सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया।

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