क्या आपने कभी किसी को सोते हुए बड़बड़ाते, फुसफुसाते या पूरी बातचीत करते सुना है? कई लोगों के लिए नींद में बोलना एक सामान्य अनुभव है। नींद मनोवैज्ञानिक के तौर पर काम करने वाले विशेषज्ञ माइकल आर. नाडोर्फ के अनुसार, नींद में बोलना उन घटनाओं में शामिल है जिन्हें पैरासोमनिया कहा जाता है।
पैरासोमनिया में नींद के दौरान शरीर कुछ गतिविधियां करता है या दिमाग कुछ अनुभवों से गुजरता है। इनमें बुरे सपने, नींद में चलना और नींद में बोलना शामिल हैं। ज्यादातर मामलों में ये घटनाएं आम और पूरी तरह हानिरहित होती हैं। इन्हें तभी विकार माना जाता है, जब ये इतनी बार हों कि व्यक्ति के लिए वास्तविक समस्या पैदा करने लगें।
नींद में बोलने के पीछे क्या होता है?
सोते समय व्यक्ति का दिमाग पूरी तरह बंद नहीं होता। रात के अलग-अलग चरणों में मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्से सक्रिय रहते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि नींद में बोलना तब हो सकता है, जब भाषा और बोलने के लिए जिम्मेदार मस्तिष्क के हिस्से सक्रिय रहते हैं, जबकि मुंह को बोलने से रोकने वाले हिस्से नींद में होते हैं।
इसी वजह से व्यक्ति नींद में बड़बड़ा सकता है, हंस सकता है या फुसफुसा सकता है।
नींद में बोलना सिर्फ REM नींद में नहीं होता
नींद एक ही अवस्था नहीं है। हर रात व्यक्ति नींद के कई चरणों से गुजरता है। करीब एक चौथाई नींद REM यानी Rapid Eye Movement चरण में होती है। इसी दौरान ज्यादातर सपने, खासकर जीवंत सपने, आते हैं।
वहीं Non-REM नींद में गहरी नींद की अवस्थाएं भी शामिल हैं और यह रात की कुल नींद का करीब 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा होती है।
नींद में बोलना नींद के किसी भी चरण में हो सकता है।
REM नींद में कही गई बातें सपने से जुड़ी हो सकती हैं
नींद पर शोध करने वाली प्रयोगशालाओं में किए गए अध्ययनों के अनुसार, REM नींद के दौरान व्यक्ति जो बोलता है, वह करीब 80 प्रतिशत मामलों में उसी समय देखे जा रहे उसके सपने से मेल खाता है।
कुछ मामलों में ऐसा लगता है कि नींद में बोलने वाला व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के साथ वास्तविक बातचीत कर रहा है। वह दूसरे व्यक्ति के जवाब देने के लिए रुक भी सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह उसके सपने में चल रही बातचीत का हिस्सा हो सकता है।
नींद में बोलते समय लोग क्या कहते हैं?
ज्यादातर मामलों में नींद में बोलना स्पष्ट शब्दों में नहीं होता। व्यक्ति बड़बड़ा सकता है, हंस सकता है या फुसफुसा सकता है।
अगर कोई शब्द बोला जाता है तो ‘नहीं’ सबसे आम शब्द है, जो नींद में बोले गए कुल शब्दों का करीब पांच प्रतिशत होता है।
नींद में बोलने वाले लोग अक्सर सवाल पूछ सकते हैं और कभी-कभी अपशब्द भी बोल सकते हैं। कई बार ऐसा भी लगता है कि वे किसी से बहस कर रहे हैं।
क्या नींद में बोलने वाले व्यक्ति से सवाल पूछ सकते हैं?
अध्ययनों में पाया गया है कि नींद में बोलने वाले व्यक्ति से सवाल करने पर वह करीब आधे मामलों में जवाब दे सकता है।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि उससे कोई गुप्त बात उगलवाई जा सकती है। ऐसा होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
नींद में बोलना कितना आम है?
नींद में बोलना काफी आम है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दो-तिहाई से अधिक लोग जीवन में कभी न कभी नींद में बोलते हैं।
आम तौर पर यह चिंता का विषय नहीं माना जाता। हालांकि, इससे नींद में चलने जैसी अन्य पैरासोमनिया की संभावना बढ़ सकती है।
बच्चों में नींद में बोलना ज्यादा क्यों होता है?
बच्चों में नींद में बोलना अधिक आम है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में Slow-Wave Non-REM नींद अधिक होती है।
उम्र बढ़ने के साथ इस तरह की गहरी नींद का अनुपात कम होता जाता है और संभव है कि इसी कारण नींद में बोलने की घटनाएं भी घटती जाएं।
नींद में चलना, रात में डर जाना या बिस्तर गीला करना जैसी अन्य पैरासोमनिया भी उम्र बढ़ने के साथ कम हो जाती हैं।
ज्यादा थकान से बढ़ सकती है नींद में बोलने की समस्या
विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक थकान होने पर नींद में बोलने और अन्य पैरासोमनिया की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
इसलिए कभी-कभी नींद में बोलना अपने आप में घबराने की वजह नहीं है। यह संभव है कि व्यक्ति को पर्याप्त आराम और कुछ अतिरिक्त नींद की जरूरत हो।
नींद के अलग-अलग चरण क्या होते हैं?
हर रात नींद के अलग-अलग चरण लगभग हर 90 मिनट में चक्र के रूप में दोहराते हैं।
Non-REM नींद
सोने के तुरंत बाद Non-REM नींद अधिक होती है। इसमें गहरी नींद की अवस्थाएं भी शामिल हैं। इस दौरान शरीर की गतिविधियां काफी धीमी हो जाती हैं, जिससे उसे आराम करने और खुद की मरम्मत करने का अवसर मिलता है।
REM नींद
सुबह के शुरुआती घंटों में REM नींद का हिस्सा बढ़ जाता है। इसी चरण में ज्यादातर सपने, खासकर जीवंत सपने, आते हैं।
नींद शरीर और दिमाग के लिए क्यों जरूरी है?
शोधकर्ताओं के अनुसार, नींद याददाश्त को मजबूत करने, बच्चों के विकास और प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
हर रात नींद के अलग-अलग चरणों से गुजरना इसी नींद की संरचना का हिस्सा है, जिसे डॉक्टर ‘स्लीप आर्किटेक्चर’ कहते हैं।
उम्र के हिसाब से कितनी नींद जरूरी है?
दिए गए विशेषज्ञ विवरण के अनुसार:
- किशोर: हर रात 8 से 10 घंटे
- 3 से 5 साल के बच्चे: 10 से 13 घंटे
- 6 से 12 साल के बच्चे: 9 से 12 घंटे
कब नींद में बोलना समस्या माना जा सकता है?
ज्यादातर मामलों में नींद में बोलना सामान्य और हानिरहित होता है। इसे तब विकार माना जाता है, जब ऐसी घटनाएं इतनी बार हों कि व्यक्ति के लिए वास्तविक समस्या पैदा करने लगें।
अगर ऐसी समस्याएं परेशान करने लगें तो स्लीप साइकोलॉजिस्ट, यानी नींद से जुड़ी समस्याओं पर काम करने वाले मनोवैज्ञानिक से उपचार लिया जा सकता है।
नींद में बोलना नींद के दौरान होने वाली एक आम घटना है और इसे पैरासोमनिया की श्रेणी में रखा जाता है। यह नींद के किसी भी चरण में हो सकता है। व्यक्ति नींद में बड़बड़ा सकता है, हंस सकता है, फुसफुसा सकता है या कभी-कभी ऐसा लग सकता है कि वह किसी से बातचीत कर रहा है।
अधिकतर मामलों में नींद में बोलना चिंता का विषय नहीं होता। बच्चों में यह अधिक आम है और उम्र बढ़ने के साथ इसकी घटनाएं कम हो सकती हैं। अत्यधिक थकान भी नींद में बोलने और अन्य पैरासोमनिया की घटनाओं को बढ़ा सकती है।
स्रोत: द कन्वरसेशन | विशेषज्ञ: माइकल आर. नाडोर्फ






Leave a Reply