bareillylive : श्री रामायण मंदिर माधवबाड़ी में चल रहे तुलसी जयंती महोत्सव के चौथे दिन कथा व्यास पूज्य श्री धनवंतरी दास जी महाराज ने कथासंकल्प प्रस्तुत किया। महाराज जी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने अपने ग्रंथ रामचरितमानस में सभी का समावेश कर सबकी वन्दना की है।
उन्होंने आज विशेष रूप से “नाम की महिमा” और उसके महत्व को सरल व प्रभावशाली तरीके से समझाया और कहा कि जीवन में नाम जप का अभ्यास जवानी से आरंभ कर देना चाहिए क्योंकि यह वृद्धावस्था तक स्मृति में बना रहता है। नाम जप में कोई पाबंदी नहीं है — निरंतरता ही इस साधना की कुंजी है।
महाराज जी ने वृन्दावन के गुरु गोपाल जी की नाम जप की प्रेरक कथा सुनाकर भक्तों के हृदय में श्रद्धा का संचार किया और बताया कि यदि मानव की प्रकृति नाम जप की हो जाए तो चित्त स्वभावतः शुद्ध हो जाता है।
उन्होंने रैदास जी का पद गाकर श्रोताओं को नामरस में डुबो दिया। कथा के दौरान “अब कैसे छूटे, राम रट लागी” भजन ने वातावरण को भक्तिमय कर दिया। साथ ही जय–विजय के वैकुंठ से पतन की मार्मिक कथा सुनाकर उन्होंने अहंकार के दुष्प्रभाव पर प्रकाश डाला।
कथा के मुख्य आकर्षण में श्रीराम जन्मोत्सव का भव्य आयोजन शामिल रहा। जब महाराज जी ने “भए प्रगट कृपाला दीन दयाला…” भजन गाया तो “राम लला की जय” के उद्घोष से पूरा मंदिर गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु एक-दूसरे को आशीर्वाद देते दिखाई दिए और नन्हे बालकों को राम रूप में देखकर भावविभोर हो गए। राम कथा के यजमान श्री राधे श्याम भाटिया एवं श्रीमती नीतू भाटिया उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में भक्तों की भारी उपस्थिति और गहन श्रद्धाभाव देखने को मिला।






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