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अकीदत और एहतराम के साथ दरगाह शाहदाना वली पर बंटा शर्बत

अकीदत और एहतराम के साथ दरगाह शाहदाना वली

bareillylive @bareillynews#उर्स के दूसरे दिन निकला जुलूस-ए-गागर, दरगाह पर अकीदतमंदों ने की चादरपोशी और गुलपोशी

बरेली। कुतुबे बरेली हजरत शाहदाना वली रहमतुल्लाह अलैह के उर्स के दूसरे दिन दरगाह पर अकीदत और एहतराम का माहौल रहा। आस्ताने पर दिनभर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान अकीदतमंदों ने शर्बत का वितरण किया और बड़ी संख्या में जायरीन ने दरगाह पर पहुंचकर अपनी अकीदत पेश की।

उर्स के दूसरे दिन कार्यक्रम की शुरुआत बाद नमाज-ए-फज्र तिलावत-ए-कुरान पाक से हुई। मस्जिद के इमाम मौलाना मुशाहिद रजा ने मजार-ए-मुबारक पर सलातो-सलाम का नजराना पेश किया।

परंपरागत मार्ग से निकला जुलूस-ए-गागर

बाद नमाज-ए-असर चक नवादा से महबूब साबरी, खलीफा-ए-अली शाह मियां, सज्जादानशीन साबिर-ए-पाक मरहूम अब्दुल करीम के निवास से जुलूस-ए-गागर की शुरुआत हुई। शहजादा-ए-तहसीन मिल्लत हजरत सूफी रिजवान मियां की सरपरस्ती में जुलूस हाजी फुरकान के निवास पर पहुंचा, जहां फातिहा हुई।

इस दौरान अब्दुल वाहिद खां नूरी, सूफी रिजवान रजा खां नूरी, वसी अहमद वारसी, मिर्जा मुकर्रम बेग, गुल्लन खां, मिर्जा शहाब बेग, उस्मान अल्वी और यूसुफ इब्राहिम सहित जुलूस में शामिल लोगों की दस्तारबंदी की गई।

जुलूस-ए-गागर अपने परंपरागत मार्गों से होते हुए चुंगी, काकर टोला, शाहदाना और दादू कुआं से होकर दरगाह पहुंचा। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर जुलूस का इस्तकबाल किया गया।

दरगाह पहुंचने पर मुतवल्ली अब्दुल वाजिद खां उर्फ बब्बू मियां ने जुलूस-ए-गागर में शामिल लोगों की दस्तारबंदी की और लंगर का तबर्रुक तकसीम किया।

अमनो-अमान और भाईचारे के लिए हुई खास दुआ

इसी क्रम में नबीरे आला हजरत एवं दरगाह ताजुश्शरिया के सज्जादानशीन मुफ्ती मोहम्मद असजद रजा कादरी की ओर से मीडिया प्रभारी सामरान रजा और मोइन रजा सय्यदा साहब ने उर्स-ए-शाहदाना वली के मौके पर दरगाह पर चादरपोशी और गुलपोशी की। इस दौरान हिंदुस्तान में अमनो-अमान, भाईचारे, सलामती और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई।

उलमा ने बयान की बुजुर्गों की करामात

रात करीब 9 बजे दूरदराज से आए उलमा-ए-कराम ने खिताब किया। मुफ्ती हसनैन मंजूरी, शायरे इस्लाम सईद अख्तर जोखनपुरी, सुआले रजा वारसी और मौलाना आला उद्दीन ने सरकार गौसे पाक, ख्वाजा गरीब नवाज, वारिस-ए-पाक, साबिर-ए-पाक और सरकार शाहदाना वली की करामातों का जिक्र करते हुए रूहानी जिंदगी पर रोशनी डाली।

देर रात करीब 1:38 बजे हुजूर मुफ्ती-ए-आजम हिंद के कुल शरीफ की फातिहा के बाद हिंदुस्तान में अमनो-अमान और भाईचारे के लिए विशेष दुआ की गई।

उर्स की व्यवस्थाओं में यूसुफ इब्राहिम, वसी अहमद वारसी, गफूर पहलवान, मिर्जा शहाब बेग, गुल्लन खां, अकरम वारसी, मौलाना आला उद्दीन, अब्दुल सलाम रजा, रौनक साबरी, नईम साबरी, ताजीम साबरी, नाजिम साबरी, अजर साबरी, कासिम साबरी, अली हैदर, जर्दब साबरी, बुरा और जावेद खां समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

15 सितंबर को होगी महफिल-ए-समा

मीडिया प्रभारी वसी अहमद वारसी ने बताया कि 15 सितंबर को रात 9 बजे से महफिल-ए-समा का आयोजन किया जाएगा, जो देर रात तक चलेगा। उन्होंने अकीदतमंदों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की।

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