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एसआरएमएस रिद्धिमा में तीन दिवसीय ‘कथांगिक – कथक कार्यशाला’ का सफल समापन

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Bareillylive : एसआरएमएस रिद्धिमा में 08 से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय ‘कथांगिक – कथक कार्यशाला’ का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला का शुभारंभ सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना, कोरियोग्राफर एवं गुरु विदुषी ममता महाराज द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर संस्थान की एडवाइजर डॉ. रीता शर्मा भी उपस्थित रहीं। कार्यशाला में प्रतिभागियों को कथक नृत्य की पारंपरिक शैली, तकनीक और सूक्ष्म बारीकियों का गहन प्रशिक्षण दिया गया।

विदुषी ममता महाराज पद्म विभूषण कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज की पुत्री तथा लखनऊ घराने की प्रतिष्ठित कथक कलाकार हैं। उनके मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने कथक के भाव, अभिनय, पद-संचालन, ताल, लय, तत्कार, चक्कर एवं अभिव्यक्ति का व्यावहारिक अभ्यास किया। कार्यशाला के दौरान जनसम्मोहिनी तराना (तीनताल) के अंतर्गत तिहाई, टुकड़ा, परमेलू एवं लड़ी का अभ्यास कराया गया। इसके साथ ही कथक सम्राट पंडित बिंदादीन महाराज द्वारा रचित प्रसिद्ध ठुमरी “आवत श्याम लचक चले मुकुट धरे” पर भाव एवं अभिनय की सूक्ष्म अभिव्यक्तियों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

तीन दिवसीय कार्यशाला में कुल 47 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक बताया। कार्यशाला के सफल आयोजन में संस्थान के कथक गुरु देबज्योति नस्कर, रियाश्री चटर्जी एवं अंशु कुमार शर्मा का विशेष योगदान रहा। तीनों गुरुओं ने विदुषी ममता महाराज के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को निरंतर सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान किया।

कार्यशाला में संगीत संगत देने वाले कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गायन में सात्विक मिश्रा, हारमोनियम पर पवन भारद्वाज, सितार पर सीमा तथा तबले पर अमरनाथ ने अपनी उत्कृष्ट संगत से प्रशिक्षण सत्रों को प्रभावशाली बनाया। इन कलाकारों की सहभागिता से प्रतिभागियों को कथक के लय, ताल एवं भाव पक्ष को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला।

समापन समारोह में संस्थान के पदाधिकारी एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे। एसआरएमएस रिद्धिमा का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय कलाओं की समृद्ध परंपरा से जोड़ना तथा अनुभवी गुरुओं के मार्गदर्शन में उनकी कलात्मक अभिव्यक्ति को सशक्त बनाना है। संस्थान भविष्य में भी ऐसी शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करता रहेगा, जिससे भारतीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन होता रहे।

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