Bareillylive : एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार (11 अक्टूबर 2026) शाम भरतनाट्यम पर आधारित नृत्य नाटिका ‘देव्यो दयम’ के माध्यम से ‘महिषासुर मर्दिनी’ का भव्य मंचन हुआ। कार्यक्रम में भरतनाट्यम के गुरुओं और विद्यार्थियों ने देवी दुर्गा द्वारा राक्षस राजा महिषासुर के अत्याचार के अंत और धर्म की पुनःस्थापना की अमर कथा को मंच पर जीवंत किया।
रिद्धिमा प्रेक्षागृह शास्त्रीय नृत्य, संगीत, ललित कला एवं रंगमंच को समर्पित संस्थान है, जो बरेली की सांस्कृतिक विरासत को संजोने का कार्य करता है।
दैवीय कथा का मंचन :
‘महिषासुर मर्दिनी’ की कथा महिषासुर की कठोर तपस्या और भगवान ब्रह्मा से प्राप्त वरदान से आरंभ होती है। वरदान से अपार शक्ति पाकर महिषासुर अहंकार से भर उठता है और तीनों लोकों में अत्याचार फैलाता है। वह देवताओं को पराजित करता है, धर्म को कुचलता है और सृष्टि के संतुलन को भंग कर देता है।
असहाय होते देवता अपनी दैवीय शक्तियों को एकत्र करते हैं, जिससे माँ दुर्गा का जन्म होता है। साहस, करुणा, शक्ति और धर्म की प्रतीक बनी दुर्गा दिव्य अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर देवताओं के आशीर्वाद से महिषासुर तथा उसकी विशाल सेना के विरुद्ध युद्ध के लिए निकलती हैं।
अभिनय और कोरियोग्राफी :
प्रस्तुति में भावपूर्ण अभिनय, लयबद्ध पद-संचालन, दमदार कोरियोग्राफी और प्रभावशाली संगीत का सुंदर संगम देखने को मिला। अराजकता से दैवीय जागृति तक की यात्रा को भरपूर अभिनय शक्ति के साथ प्रस्तुत किया गया। अंतिम युद्ध में महिषासुर के विनाश के साथ शांति और ब्रह्मांडीय संतुलन की पुनःस्थापना होती है।
प्रस्तुति का संदेश स्पष्ट था कि ‘महिषासुर मर्दिनी’ केवल जीत की कहानी नहीं है, बल्कि यह शक्ति का उत्सव है। यह याद दिलाती है कि जब भी अंधेरा छाता है, संतुलन बहाल करने के लिए दैवीय नारी शक्ति का उदय होता है।
कलाकारों की प्रस्तुति :
एसआरएमएस रिद्धिमा में भरतनाट्यम गुरु तान्या भट्टाचार्य, प्रशांत जमतिया एवं विद्यार्थियों ने इस नृत्य नाटिका को प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों में आध्या, शरान्या, अवंतिका, पर्या, वान्या, नएसा, प्रगवी, अमायरा, शांभवी, सानवी, मेहेर, भव्या, अनिका, संस्कृति, चिरान्या, सव्या, तानिशि, अन्वी, आनंशी और जानवी ने भाग लिया।
थिएटर गुरु विनय श्रीवास्तव द्वारा निर्देशित इस प्रस्तुति में संगीत का निर्देशन इंस्ट्रूमेंट गुरु सूर्यकांत चौधरी ने संभाला। गायन गुरु सात्विक मिश्रा ने अपनी आवाज से नृत्य नाटिका को और अधिक जीवंत बनाया। थिएटर के विद्यार्थियों हरिद्यांश उपाध्याय, विष्णु यादव, दुर्गेश मिश्रा, रचित यादव, प्रथम शर्मा, गोविन्द, आशुतोष, इल्हाम और संजय सिंह ने भी उत्कृष्ट साथ दिया।
उपस्थित गणमान्य :
कार्यक्रम में एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चेयरमैन देव मूर्ति जी, आशा मूर्ति जी, उषा गुप्ता, डा. प्रभाकर गुप्ता, डा. अनुज कुमार, डा. शैलेंद्र सक्सेना और डा. रीता शर्मा सहित शहर के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। दर्शकों ने कलाकारों के जोशीले प्रदर्शन, संगीत और मंच सज्जा की भरपूर सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में भरतनाट्यम की परंपरा, नृत्य नाटिका की भावभंगिमाओं और देवी शक्ति के संदेश ने दर्शकों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। ‘देव्यो दयम’ का यह मंचन शास्त्रीय कला के प्रति युवा पीढ़ी की रुचि बढ़ाने और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का प्रभावी प्रयास रहा।





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