bareillylive@bareillynews:कालाजार से बचाव के लिए मच्छरदानी का करें इस्तेमाल: विशेषज्ञ
बरेली। उत्तर प्रदेश के सात कालाजार असंवेदनशील जनपदों बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, सम्भल और रामपुर के स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए बरेली के रेडिसन होटल में कालाजार की पहचान, बचाव और उपचार पर कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला की अध्यक्षता अपर निदेशक मलेरिया एवं वेक्टर जनित रोग, उत्तर प्रदेश डॉ. ए.के. चौधरी ने की। कार्यक्रम में अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण बरेली मंडल डॉ. सीमा अग्रवाल सहित विभिन्न जिलों के स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे।
विशेषज्ञों ने बताया कि कालाजार (विसेरल लीशमैनियासिस) लीशमैनिया डोनोवानी परजीवी से होने वाली गंभीर बीमारी है, जो सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) के काटने से फैलती है। समय पर उपचार न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकती है।
इसके प्रमुख लक्षणों में लगातार बुखार, तिल्ली और यकृत का बढ़ना, शरीर में खून की कमी, वजन घटना, भूख कम लगना तथा त्वचा का रंग गहरा पड़ना शामिल हैं।
कार्यशाला में बताया गया कि बीमारी की पुष्टि के लिए rK39 रैपिड टेस्ट, सीबीसी और आवश्यकता होने पर अन्य जांचें कराई जाती हैं। उपचार केवल चिकित्सकीय निगरानी में ही कराया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों ने कहा कि कालाजार की कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। लोगों से कीटनाशक युक्त मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने, पूरी बांह के कपड़े पहनने, घरों की दरारें बंद रखने तथा सैंडफ्लाई के संभावित ठिकानों पर कीटनाशकों का छिड़काव कराने की अपील की गई। कार्यशाला में मलेरिया, डेंगू और फाइलेरिया की रोकथाम पर भी जानकारी दी गई।






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