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“हम-तुम एक कमरे में बंद थे” और “अकबर” चला गया…

ऋषि कपूर को याद करते हुए निखिल आडवाणी ने लिखा- एक एक्टर अपने निर्देशक को जो इज़्ज़त देता है, उतनी आप से पहले किसी ने नहीं दी। वह भी तब जबकि आप कौन हैं। आप मेरे दोस्त थे सर।

नई दिल्ली। “पान सिंह तोमर” को इस दुनिया से रुखसत हुए 24 घंटे भी नहीं हुए थे कि “हम-तुम जब एक कमरे में बंद थे” तो “अकबर” भी चला गया। हिंदी सिनेमा को दो दिन में लगे ये दो बड़े आघात हैं जिनसे उबरने में काफी वक्त लगेगा। बुधवार को सायंकाल इरफ़ान ख़ान को सुपुर्दे-ख़ाक किया गया था और गुरुवार को सुबह 8:45 बजे ऋषि कपूर भी अनंत यात्रा पर चले गए।

इरफान खान और ऋषि कपूर दोनों बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेताओं में शुमार थे लेकिन जहां इरफान ने अभिनय के नये-नये प्रतिमान गढ़े वहीं ऋषि का स्टारडम उनके चाहने वालों की आंखें चुंधियाता रहा। इतने लंबे करियर के बावजूद इन दोनों ने महज एक फिल्म में ही साथ काम किया। यह फ़िल्म थी निखिल आडवाणी निर्देशित डी-डे जिसमें ऋषि कपूर ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम से प्रेरित रोल किया था जबकि इरफ़ान ख़ान रॉ एजेंट बने थे।

इस फ़िल्म के प्रमोशन के दौरान इरफ़ान ख़ान से जब ऋषि कपूर के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने जवाब दिया था, “मेरे कज़िन उनके बहुत बड़े फैन हैं। हालांकि मैंने उनकी सभी फ़िल्में देखी हैं। मुझे नहीं लगता कि मेरे अंदर कभी था कि मैं ऋषि कपूर जैसा बन पाऊंगा। वे इतने तरल हैं। उन्होंने अपनी कला को तैयार करने में बहुत काम किया है। वे ऐसे सितारों में शामिल हैं जो लगातार एक जैसी फ़िल्में करते रहते हैं मगर फिर भी उनसे कुछ-कुछ नया मिलता रहता है।” 2013 में रिलीज हुई यह फ़िल्म मोस्ट वॉन्टेड अपराधी को पाकिस्तान से भारत लाने के मिशन पर आधारित थी। यह पहली बार था कि ऋषि कपूर ने पर्दे पर किसी डॉन का किरदार निभाया हो। करियर की इस पारी में ऋषि काफ़ी प्रयोगधर्मी हो गए थे और अपने किरदारों के साथ एक्सपेरिमेंट करने लगे थे। 

ऋषि को याद करते हुए निखिल ने लिखा- एक एक्टर अपने निर्देशक को जो इज़्ज़त देता है, उतनी आप से पहले किसी ने नहीं दी। वह भी तब जबकि आप कौन हैं। आप मेरे दोस्त थे सर। मैं बैठा हूं, याद कर रहा हूं और हंस रहा हूं। आपकी जोशीली आवाज़ का इंतज़ार कर रहा हूं- ब्वॉय, मेरे लिए एक और ड्रिंक बना दो।

बेस्ट एक्टर से लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड तक

ऋषि कपूर का जन्म 4 सितम्बर 1952 को मुंबई के चेंबूर में हुआ। उन होंने ने अपनी शुरुआती पढ़ाई कैंपियन स्कूल, मुंबई से की। इसके बाद अजमेर के मेयो कॉलेज से आगे की पढ़ाई की। बतौर बाल कलाकर उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की। बतौर लीड एक्टर बॉबी उनकी पहली फ़िल्म थी। इस फ़िल्म को उनके पिता राज कपूर ने निर्देशित किया था जिसके लिए उन्हें 1974 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिला। साल 2008 में ऋषि कपूर को फिल्म फेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी नवाजा गया।  

ऋषि ने अपने फ़िल्मी करियर में बॉबी, अमर अकबर एंथनी, चांदनी, प्रेम रोग, नागिन, दीवाना, प्रेम ग्रंथ, दरार, याराना, दामिनी, हिना, घराना जैसी कई शानदार फ़िल्में कीं। गौरतलब है कि ऋषि कपूर के पिता और दादा पृथ्वीराज कपूर भी कला की इस दुनिया में सक्रिय रहे। ऋषि के बटे रणबीर कपूर इस वक्त बॉलीवुड में सक्रिय हैं। 

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