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कई असाध्य रोगों का रामबाण इलाज हैं गेहूं के ज्वारे का रस


गेहूं के ज्वारे ये सिर्फ़ एक आयुर्वेदिक औषधि ही नहीं बल्कि एक उत्तम आहार भी है। गेहूं के ज्वारे को हम जूस, पाउडर और टेबलेट किसी भी तरह से ले सकते है पर प्रतिदिन ताजा जूस बना कर पिने से ज्यादा फायदा मिलता है। रोजाना व्हीटग्रास जूस के सेवन से बॉडी स्टैमिना और एनर्जी तो बढ़ती ही है साथ ही कई प्रकार के रोगों का इलाज करने में भी मदद मिलती है ।
व्हीटग्रास में कई प्रकार के पोषक तत्व मौजूद है जिसमें सबसे अहम् है क्लोरोफिल। इसके इलावा व्हीट ग्रास में प्रोटीन, विटामिन, फाइबर, कैल्शियम और कार्बोहाइड्रेट्स भी आधिक मात्रा में होते है। कैंसर जैसे गंभीर रोग के इलाज में भी गेंहू के ज्वारे का सेवन काफी फायदेमंद है और इसके इलावा
पायरिया,
ब्लड शुगर,
पथरी,
दिल की बीमारी,
गाल ब्लैडर स्टोन,
लकवा,
पीलिया,
पाचन तंत्र खराब होना,
गैस, क़ब्ज़, बवासीर,
स्किन प्रॉब्लम,
बालों की समस्या,
कोई चोट लगना या फिर घाव होना और आँखों की समस्या जैसी अनेकों बिमारियों के उपचार में व्हीटग्रास जूस का सेवन करने से बहुत फायदा मिलता है।

गेहूं के जवारे के पत्ते चबा कर भी खा सकते है और इसका रस निकाल कर भी इसे पी सकते है। घर पर गेहूं का ज्वारा उगाने की विधि आगे इस लेख में बताई गयी है और अगर आप घर पर नहीं उगा सकते तो बाजार से व्हीटग्रास पाउडर पतंजलि का भी ले सकते है , जिसे आप जूस, पानी या शेक में डाल कर पी सकते है।
आइये जानते है घर पर व्हीटग्रास जूस कैसे बनाए, व्हीट ग्रास जूस
1. आठ से दस गेंहू के ज्वारे की पत्तियां जड़ से काट कर अच्छे से धो ले। अब इसे कूट कूट कर इसका रस निकाल ले।
2. गेंहू की पत्तियां कूटने के बाद एक साफ़ कपडा ले और कुटी हुई पत्तियां डाल कर इसका रस निचोड़ ले। आप जूस निकालने वाली मशीन से भी व्हीट ग्रास जूस तैयार कर सकते है।
3. व्हीटग्रास जूस निकलने के बाद इसे रखे नहीं तुरंत पी जाए और एक बात का विशेष ध्यान रखे की जूस को चाय की तरह सीप सीप कर के ही पिए, एक घूंट में कभी ना पिए।
4. जूस निकालते समय इसमें आंवला, नीम, गिलोय, तुलसी, शहद और अदरक भी डाल सकते है। इनके प्रयोग से जूस के गुण और भी बढ़ जाते है।
5. आप इस जूस में थोड़ा पानी भी मिला सकते है पर ध्यान रहे इसमें नींबू और नमक बिल्कुल ना डाले।
व्हीटग्रास जूस कितनी मात्रा में ले
1. अगर आप किसी रोग से ग्रस्त है तो प्रतिदिन 30 से 50 मिली. जूस दिन में दो से तीन बार ले।
2. शुरू में गेहू के जवारे के रस को कम मात्रा में ही ले फिर धीरे धीरे इसकी मात्रा को बढ़ाए।
3. एक हफ्ते में कम से कम पांच दिन इसका सेवन अवश्य करे।
* गेंहू के जवारे केसे उगाऐ ।
गेंहू बोने के बाद जब पत्तियां अंकुरित होती है तो इसी अंकुरित गेहूं को ही गेंहू का ज्वारा, व्हीट ग्रास या घास कहते है। गेंहू के ज्वारे में भरपूर मात्रा में नुट्रिशन होते है जिससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी को बिना किसी दवा के एक नेचुरल तरीके से पूरा किया जा सकता है।
व्हीट ग्रास उगाने के लिए अच्छी किस्म का ऑर्गनिक बीज ही इस्तेमाल करे।
सबसे पहले गेंहू के बीजों को एक बर्तन में आठ से दस घंटे तक पानी में भिगो कर रखे फिर इसे साफ़ पानी से धो ले।
अब किसी गमले में खाद मिली हुई मिट्टी डाले फिर गेंहू के जवारे उगाने के लिए इस गमले में इतने बीज फैला कर डाले की बीजों से सारी मिट्टी ढक जाए और इस बात का विशेष ध्यान रहे की किसी बीज के ऊपर बीज ना आए।
अब गमले में पानी डाल कर इसे छाया में रख दे।
इसी तरह अगले दिन एक और गमले में बीज लगाए।
सात दिनों तक हर रोज इसी तरीके से गमले में गेंहू के बीज बोते रहे और साथ ही पुराने गमलों को पानी देते रहे।
सात दिन के बाद आप देखेंगे की पहले दिन लगाए हुए गमले की गेंहू अंकुरित हो कर घास जैसी दिखने लगी है। अब ये कटाई के लिए त्यार है। कटाई करने के खाली गमले में आप फिर से गेंहू के बीज बो दे।
सात आठ दिनों में ज्वारे छह से सात इंच तक हो जायेंगे और यही अच्छा समय है कटाई का, क्यूंकि जैसे जैसे जवारे लंबे होंगे इसके पोषक तत्व कम होने लगते है। अगर सात दिन में व्हीटग्रास काटने के लायक नहीं हुई है तो आप नौ से दस दिन बाद काट सकते हैं ।* धन्यवाद*
|| आपका अपना ||
वैद्य विजेंद्र शर्मा ( शांडिल्य )
आयुर्वेद विशारद , उपवैध
मों. नं. 94162 95632

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