बुध-शुक्र की युति से दीपावली पर बनेगा लक्ष्मी नारायण राजयोग, व्यापार और आर्थिक उन्नति के संकेत

आचार्य राजेश कुमार शर्मा ने बताया दीपावली 2026 का पंचांग, 8 नवंबर को होगा लक्ष्मी-गणेश पूजन; 6 नवंबर से शुरू होंगे पांच दिवसीय पर्व के आयोजन

बरेली@bareillylive:बरेली। इस वर्ष दीपावली का पर्व ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष संयोग लेकर आ रहा है। बुध और शुक्र की युति से बनने वाला लक्ष्मी नारायण राजयोग दीपावली के उत्सव को और भी खास बनाएगा। ज्योतिषाचार्य आचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार यह योग सितंबर से दिसंबर तक प्रभावी रहेगा। दीपावली के अवसर पर इसके प्रभाव से आर्थिक उन्नति, संपत्ति लाभ और व्यापार में वृद्धि के अनुकूल संकेत बन रहे हैं।

आचार्य राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि दीपावली 2026 का पर्व 6 नवंबर को धनतेरस से प्रारंभ होकर 11 नवंबर को भाई दूज के साथ संपन्न होगा। इस दौरान 7 नवंबर को छोटी दीपावली, 8 नवंबर को मुख्य दीपावली और 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट का आयोजन होगा।

6 नवंबर : धनतेरस से पर्व का शुभारंभ

दीपावली उत्सव की शुरुआत 6 नवंबर, शुक्रवार को धनतेरस से होगी। इसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि धनतेरस पर सोना-चांदी, आभूषण, बर्तन और अन्य नई वस्तुएं खरीदना शुभ होता है। कई घरों में शाम को यम दीप भी जलाया जाता है।

धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:02 बजे से रात 7:57 बजे तक रहेगा।

7 नवंबर : छोटी दीपावली और रूप चौदस

शनिवार, 7 नवंबर को कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रहेगी। इस दिन छोटी दीपावली, नरक चतुर्दशी, काली चौदस और रूप चौदस से जुड़ी परंपराएं निभाई जाएंगी। घरों में दीप प्रज्ज्वलित कर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी।

8 नवंबर : मुख्य दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन

रविवार, 8 नवंबर को कार्तिक अमावस्या के अवसर पर मुख्य दीपावली मनाई जाएगी। इस दिन घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाएगी।

आचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार पंचांग में लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक है। इस दौरान प्रदोष काल के साथ वृषभ लग्न का संयोग भी रहेगा, जिसे पूजा-अर्चना के लिए शुभ माना जाता है।

महानिशीथ काल का मुहूर्त

तंत्र साधना और विशेष पूजा-अर्चना के लिए महानिशीथ काल का समय रात 11:49 बजे से मध्यरात्रि 12:33 बजे तक बताया गया है।

बुध-शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग

इस वर्ष दीपावली पर बनने वाला प्रमुख ज्योतिषीय संयोग लक्ष्मी नारायण राजयोग है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार बुध और शुक्र की युति से यह योग बन रहा है, जिसका प्रभाव सितंबर से दिसंबर तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध को बुद्धि, वाणी, व्यापार और गणना का कारक माना जाता है, जबकि शुक्र सुख-सुविधा, वैभव, धन और भौतिक समृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है। दोनों ग्रहों की युति से व्यापारिक गतिविधियों में प्रगति, आर्थिक लाभ और संपत्ति संबंधी शुभ परिणामों की संभावनाएं मानी जाती हैं।

लक्ष्मी के साथ गणेश पूजन का विशेष महत्व

दीपावली पर माता लक्ष्मी की पूजा धन, वैभव और समृद्धि की कामना से की जाती है, जबकि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभता का प्रतीक माना गया है। इसी कारण दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश का संयुक्त पूजन करने की परंपरा है। व्यापारी वर्ग के लिए भी इस पर्व का विशेष महत्व है। कारोबारी अपने प्रतिष्ठानों में बही-खातों, तिजोरी और व्यापार से संबंधित उपकरणों का पूजन कर नए वर्ष की मंगलकामना करते हैं।

9 नवंबर : प्रतिपदा तिथि का क्रम

आचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार अमावस्या तिथि 8 नवंबर को पूर्वाह्न 11:29 बजे से 9 नवंबर को दोपहर 12:33 बजे तक रहेगी। इसके बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। तिथि के इस क्रम के कारण 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा के आयोजन के लिए उपयुक्त दिन नहीं माना गया है।

10 नवंबर : गोवर्धन पूजा और अन्नकूट

मंगलवार, 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की जाती है। गोवर्धन पूजा की परंपरा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की पौराणिक कथा से जुड़ी है। घरों और मंदिरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पूजा की जाती है तथा अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।

गोवर्धन पूजा का प्रातःकालीन शुभ मुहूर्त सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक रहेगा। वहीं सायंकालीन मुहूर्त दोपहर 3:30 बजे से शाम 5:45 बजे तक बताया गया है।

11 नवंबर : भाई दूज के साथ दीपोत्सव का समापन

बुधवार, 11 नवंबर को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। भाई भी बहनों को उपहार देकर उनके प्रति प्रेम और स्नेह व्यक्त करते हैं।

इस प्रकार धनतेरस से शुरू होने वाला दीपोत्सव भाई दूज के साथ संपन्न होगा। आचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार इस बार दीपावली का पर्व धार्मिक परंपराओं के साथ विशेष ज्योतिषीय संयोगों के कारण भी महत्वपूर्ण रहेगा।

आचार्य राजेश कुमार शर्मा

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