काठमांडू: नेपाल के गोरखा जिले में रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बाढ़ में करीब 35 घर और छह पुल बह गए, जबकि कम से कम 10 लोग लापता हैं। लापता लोगों की तलाश में बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
बाढ़ से 341 मेगावाट क्षमता वाली बूढ़ी गंडकी जलविद्युत परियोजना का निर्माण शिविर और कई मशीनें भी बह गईं। बताया गया है कि रविवार सुबह करीब चार बजे बाढ़ का पानी नदी किनारे स्थित बस्तियों में घुस गया। अचानक बढ़े जलस्तर के कारण लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।
भूस्खलन से नदी का रास्ता बंद होने की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन के कारण चुन्चुब्री स्यारी नदी का रास्ता अवरुद्ध हो गया था। इससे पानी जमा हो गया और बाद में अवरोध टूटने पर पानी तेज बहाव के साथ निचले इलाकों की ओर बढ़ा। हालांकि, बाढ़ के सटीक कारणों और नुकसान का आकलन किया जाना बाकी है।
नेपाल के गोरखा जिला पुलिस कार्यालय के इंस्पेक्टर आकाश कंडेल के मुताबिक, बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सिरदिबास और धारचे ग्रामीण नगरपालिका के अंतर्गत आने वाले खोर्लाबेसी, माछाखोला, सोती, अरखेत और आरुघाट के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
SMS अलर्ट जारी, नदी किनारे रहने वालों को सतर्क रहने की सलाह
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुख्य कार्यकारी डॉ. धर्मराज उप्रेती ने बताया कि ऊपरी इलाके से बाढ़ का पानी आरुघाट पहुंचने में करीब तीन घंटे लगते हैं। इससे नदी के निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का समय मिल सकता है।
प्रशासन ने मोबाइल संदेशों के जरिए लोगों को अलर्ट किया है। सिरदिबास, जगत, यारी, तातोपानी, सोती और अरुखोला सहित नदी किनारे बसे इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
बिहार में भी बढ़ सकता है गंडक नदी का खतरा
नेपाल में बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ के बाद बिहार के नदी तटीय इलाकों में संभावित असर को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है। बूढ़ी गंडकी का जल प्रवाह आगे त्रिशूली नदी प्रणाली से जुड़ता है। इसके बाद पानी देवघाट के पास नारायणी नदी में पहुंचता है, जिसे भारत में गंडक के नाम से जाना जाता है। गंडक नदी बिहार से होकर आगे गंगा में मिलती है।
यदि नदी प्रणाली में जलप्रवाह बढ़ता है, तो बिहार के गंडक तटवर्ती क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और वैशाली जैसे जिलों में स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, नेपाल में आई इस बाढ़ के कारण बिहार में जलस्तर कितना बढ़ेगा या इसका कोई प्रत्यक्ष असर होगा या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। इसके लिए संबंधित जल संसाधन और बाढ़ निगरानी एजेंसियों के आधिकारिक अपडेट जरूरी हैं।
पहाड़ों में बिना स्थानीय बारिश के भी आ सकती है अचानक बाढ़
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आने का खतरा बना रहता है। पहाड़ों से मिट्टी, चट्टानें और मलबा खिसककर नदी या नाले का रास्ता रोक सकते हैं। इससे पानी एक जगह जमा होने लगता है।
जब पानी का दबाव बढ़ने से यह प्राकृतिक अवरोध टूटता है, तो जमा पानी तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहता है। इस दौरान बड़े पत्थर, पेड़ और मलबा भी पानी के साथ बह सकते हैं, जिससे घरों, पुलों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचता है।
ऐसी बाढ़ के लिए जरूरी नहीं कि प्रभावित गांव में उसी समय बारिश हुई हो। ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र में जमा पानी अचानक नीचे आने से दूर स्थित बस्तियों में भी तबाही मच सकती है।
पिछली बाढ़ से भी नेपाल में हुआ था भारी नुकसान
नेपाल में इससे पहले 26 अगस्त को आई बाढ़ ने भी बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। चीन के तिब्बत क्षेत्र से लगी सीमा के पास शुरू हुई उस आपदा का असर भोटेकोशी नदी और आसपास के इलाकों में पड़ा था। तेज बहाव से मकानों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा था।
बाद की सरकारी जानकारी के अनुसार, उस आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और हजारों लोग लापता बताए गए। राहत एवं बचाव अभियान के साथ प्रभावित लोगों के पुनर्वास की तैयारी भी शुरू की गई थी।
नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार भूस्खलन और अचानक बाढ़ की घटनाओं को देखते हुए नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए समय पर चेतावनी, सुरक्षित निकासी और आपदा प्रबंधन व्यवस्था महत्वपूर्ण बनी हुई है।










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