The Voice of Bareilly since 2010

नवरात्रि पंचम दिवस पर मां स्कंदमाता की पूजा से मिलेगी सुख-शांति और बुद्धि

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन (23 मार्च 2026) को मां स्कंदमाता को समर्पित किया जाता है। मां दुर्गा के नौ रूपों में पांचवां स्वरूप स्कंदमाता हैं, जो भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। वे ज्ञान, मोक्ष और ममता की देवी मानी जाती हैं। सिंह पर सवार होकर और गोद में बाल कार्तिकेय को लिए हुए मां स्कंदमाता भक्तों को सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।

नवरात्रि का पांचवां दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप, मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। भगवान कार्तिकेय की माता देवी स्कंदमाता, सिंह पर विराजमान हैं और उनकी गोद में बाल स्वरूप स्कंद। देवी माँ की चार भुजाएं है, ऊपर की दाहिनी भुजा में अपने पुत्र स्कन्द को पकड़े हुए है और इनके निचले दाहिने हाथ तथा एक बाएं हाथ में कमल का फूल है तथा माँ का दूसरा बायां हाथ अभय मुद्रा में है।

देवी माँ अपने भक्तों को सुख -शांति और संमृद्धि प्रदान करती है साथ ही माँ हमें यह सिखाती है कि हमारा जीवन एक संग्राम है और हम स्वयं अपने सेनापति है अतः देवी माँ से हमे सैन्य सञ्चालन की प्रेरणा भी मिलती है। मान्यता है कि देवी माँ अपने भक्तों पर ठीक उसी प्रकार कृपा बनाएं रखती है जिस प्रकार एक माँ अपने बच्चो पर।

इस पूजा में मुख्य मंत्र “ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः” का जाप किया जाता है। सुबह स्नान के बाद माता की मूर्ति या चित्र के समक्ष पीले फूल, फल और केले अर्पित करने से पूजा पूर्ण होती है।स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व है। इसकी आराधना से सुख, शांति, बुद्धि का विकास होता है और जीवन से दुखों का नाश होता है। भक्तों का मानना है कि मां की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति भी संभव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!