वृन्दावन, भगवान कृष्ण की लीला स्थली के रूप में विश्व प्रसिद्ध है, यहां एक ऐसा शक्तिपीठ भी स्थित है जो माँ के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यह है माँ कात्यायनी पीठ, जो वृन्दावन के राधा बाग इलाके में विराजमान है। शास्त्रों के अनुसार, यहां माता सती के केश (बाल) गिरे थे, जिसके कारण यह स्थान विशेष महत्व रखता है।
यह मंदिर न केवल शक्तिपीठ के रूप में पूजनीय है, बल्कि राधा-कृष्ण की प्रेम कथा से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राधा रानी ने गोपियों के साथ भगवान कृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माँ कात्यायनी की कठोर पूजा की थी। माता ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर वरदान दिया, लेकिन भगवान कृष्ण एक थे और गोपियां अनेक। इस वरदान को साकार करने के लिए भगवान ने महारास रचा। शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में यमुना तट पर भगवान कृष्ण ने 16,108 रूप धारण कर गोपियों के साथ दिव्य रासलीला की।
मंदिर में विराजमान माँ कात्यायनी को नवरात्रि में विशेष रूप से पूजा जाता है। भक्त यहां मंत्र जपते हैं:
कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नम:॥
यह मंत्र उन भक्तों द्वारा विशेष रूप से जपा जाता है जो जीवनसाथी की प्राप्ति या सुख-शांति की कामना रखते हैं।
वृन्दावन आने वाले श्रद्धालु इस शक्तिपीठ के दर्शन अवश्य करते हैं, जहां माँ की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। यह स्थान आस्था, भक्ति और कृष्ण-लीला की अनुपम स्मृति का संगम है।










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