bareillylive@bareillynews:दक्षिण अफ्रीका के बाद ब्रिक बना ब्रिक्स, 2024 में पांच नए देश जुड़े; 2025 में इंडोनेशिया बना सदस्य
नई दिल्ली, एजेंसी। करीब एक-चौथाई सदी पहले वैश्विक निवेश कंपनी गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने तेजी से बढ़ती चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए ‘ब्रिक’ (BRIC) शब्द गढ़ा था। ब्राजील, रूस, भारत और चीन के नाम के शुरुआती अक्षरों से बना यह शब्द आगे चलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था में उभरती शक्तियों की पहचान बन गया।
ओ’नील ने अपनी शोध रिपोर्ट का नाम ‘बिल्डिंग बेटर ग्लोबल इकोनॉमिक ब्रिक्स’ रखा था। रिपोर्ट में ब्राजील, रूस, भारत और चीन को भविष्य में वैश्विक आर्थिक वृद्धि के प्रमुख वाहक के रूप में रेखांकित किया गया था। धीरे-धीरे ‘ब्रिक’ वैश्विक निवेश जगत की चर्चित शब्दावली बन गया।
दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से बना BRICS
समय के साथ समूह का विस्तार हुआ। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद BRIC का नाम BRICS हो गया। इसके बाद समूह लगातार विस्तार करता गया और आज इसमें 11 सदस्य देश हैं।
मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात 2024 में पूर्ण सदस्य बने, जबकि इंडोनेशिया जनवरी 2025 में समूह का सदस्य बना।
इसके अलावा बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले वर्ष ब्रिक्स के साझेदार देश बने।
2006 में औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया समूह
ब्रिक को औपचारिक रूप से 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से इतर चारों देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक के दौरान स्थापित किया गया था।
ब्रिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों या शासनाध्यक्षों का पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ। इसमें तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, रूस के दिमित्री मेदवेदेव, चीन के हू जिंताओ और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा शामिल हुए थे।
आर्थिक शक्ति के रूप में बढ़ा प्रभाव
2000 के दशक में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि विकसित देशों की तुलना में तेज हो रही थी। इसी रुझान ने जिम ओ’नील को इन चार देशों की आर्थिक संभावनाओं पर शोध करने के लिए प्रेरित किया।
2003 की ‘ड्रीमिंग विद ब्रिक्स: द पाथ टू 2050’ रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि ब्रिक देश 2039 तक पश्चिम की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आगे निकल सकते हैं। इसके बाद वैश्विक बाजारों में ब्रिक्स केंद्रित म्यूचुअल फंड, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड और सूचकांक भी शुरू हुए।
नव विकास बैंक की स्थापना
ब्रिक्स देशों ने 2014 में ब्रिक्स विकास बैंक बनाने की घोषणा की थी, जिसे बाद में नव विकास बैंक (NDB) नाम दिया गया। बैंक का उद्देश्य सदस्य देशों और अन्य विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे तथा सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराना है।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आधिकारिक विषय ‘मजबूती, नवाचार, सहयोग और निरंतरता के लिए निर्माण’ है। करीब दो दशक में चार देशों के आर्थिक समूह से 11 सदस्यीय बहुराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना ब्रिक्स के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।






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