BareillyLive: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बरेली के तत्वाधान में हिंदी दिवस की 14वीं तिथि के उपलक्ष्य में जिला कारागार, बरेली में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सचिव, माननीय जया प्रियदर्शिनी के आदेशानुसार आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य कारागार में बंद कैदियों को हिंदी भाषा के महत्व एवं उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम का विस्तृत विवरण
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम ने जेल में बंद कैदियों को हिंदी दिवस के इतिहास एवं महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। 14 सितंबर को हिंदी दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में भारत की राजभाषा के रूप में अपनाया था।
इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम में सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी गई, जिनका लाभ कैदी एवं उनके परिवारजन उठा सकते हैं। विशेष रूप से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा संचालित टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 के बारे में कैदियों को अवगत कराया गया, जिसके माध्यम से वे निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
सहयोगी अधिकारी एवं आयोजक:
इस शिविर को सफल बनाने में जेल अधीक्षक का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। कार्यक्रम को संचालित करने में डिप्टी जेलर राघवेंद्र वर्मा, अध्यापक योगेश गंगवार, तथा पीएलवी/अधिकार मित्र सत्य पाल सिंह की सक्रिय भूमिका रही। इन सभी ने मिलकर कैदियों को उनके कानूनी अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता की प्रक्रिया, एवं हिंदी भाषा के संवैधानिक महत्व के प्रति जागरूक किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य एवं प्रभाव
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जेल में ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य कैदियों को उनके संवैधानिक अधिकारों से परिचित कराना एवं उन्हें निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है। NALSA की टोल-फ्री हेल्पलाइन 15100 के माध्यम से कैदी एवं उनके परिजन कानूनी सहायता हेतु संपर्क कर सकते हैं। ऐसे कार्यक्रमों से कारागार में बंद व्यक्तियों में कानूनी जागरूकता बढ़ती है एवं उन्हें पुनर्वास की मुख्यधारा से जोड़ने में सहायता मिलती है।






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