शंकरसिंह वाघेला के बयान से गुजरात की राजनीति गरमाई
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला अपने एक विवादित बयान को लेकर सियासी घमासान के केंद्र में हैं। पटेल, बनिया और ब्राह्मण समुदाय को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर विरोध शुरू हो गया है। हालांकि, आलोचनाओं के बीच वाघेला ने अपने बयान पर माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया है।
वाघेला ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी किसी समुदाय के खिलाफ नहीं थी, बल्कि आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दे को लेकर थी। उन्होंने बीजेपी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके बयान का संदर्भ समझे बिना इसे विवाद का मुद्दा बनाया जा रहा है।
क्या बोले शंकरसिंह वाघेला?
कांग्रेस नेता अमित चावड़ा की मौजूदगी में आयोजित एक कार्यक्रम में शंकरसिंह वाघेला ने कथित तौर पर कहा था कि अगर पटेल, बनिया या ब्राह्मण समुदाय के लोग गंदगी साफ करने का काम कर दें तो वह उन्हें 50 हजार रुपये नकद देंगे।
उनकी इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। विरोध करने वालों ने इसे समुदाय विशेष का अपमान बताते हुए वाघेला से माफी की मांग की।
‘मैं माफी नहीं मांगूंगा’, बयान पर कायम वाघेला
विवाद बढ़ने के बाद शंकरसिंह वाघेला ने अपने बयान पर सफाई दी और कहा कि वह किसी समुदाय के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।
वाघेला ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि उनके बयान को लेकर बिना वजह बड़ा विवाद खड़ा किया गया है। उनके मुताबिक, उनकी टिप्पणी का संदर्भ आरक्षण विरोधी सरकार और सामाजिक न्याय से जुड़ा हुआ था।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन समुदायों ने ऐतिहासिक रूप से सफाई और गंदगी उठाने जैसे कठिन कार्य किए, उनके लिए आरक्षण सामाजिक न्याय और उनके साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय का एक तरह से मुआवजा है।
ब्राह्मण समाज ने जताई नाराजगी
वाघेला की टिप्पणी के बाद गुजरात के ब्राह्मण समाज की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। प्रदेश ब्राह्मण समाज के कन्वीनर यज्ञेश दवे ने वाघेला के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें दूसरों को सीख देने के बजाय शुरुआत अपने घर से करनी चाहिए।
दवे ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर शंकरसिंह वाघेला उनके घर से कूड़ा उठाने को तैयार हैं, तो वह उन्हें हर महीने 5 लाख रुपये देने के लिए तैयार हैं।
आरक्षण के मुद्दे पर फिर आमने-सामने सियासी दल
इस विवाद ने गुजरात में एक बार फिर आरक्षण, जातीय राजनीति और सामाजिक न्याय के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। वाघेला ने जहां अपने बयान को ऐतिहासिक सामाजिक असमानता और आरक्षण के संदर्भ से जोड़कर देखा है, वहीं विरोध करने वाले इसे समुदाय विशेष को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी मान रहे हैं।
फिलहाल, वाघेला के बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है और इस मुद्दे ने गुजरात की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है।










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