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भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला सेनरगाड़ बैली ब्रिज बीआरओ ने 5 दिन में फिर बनाया

मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले 120 फीट लंबे सेनरगाड़ बैली ब्रिज को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने महज 5 दिन में फिर बना दिया है। मुन्स्यारी से मिलम जाने वाले रूट पर धापा के पास सेनर नाले पर बना यह सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पुल 22 जून को ट्राला चालक की लापरवाही के चलते टूट गया था। भारत और चीन के बीच मौजूदा तनाव को देखते हुए बीआरओ ने इसके पुनर्निर्माण को चुनौती के तौर पर लिया और 23 जून को इसका नए सिरे से निर्माण शुरू कर दिया। पुल बनने के बाद उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित 15 से अधिक गांवों सहित सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की चौकियों में आवाजाही शुरू हो गई है।

दरअसल, ट्राला चालक ने मनमानी करते हुए पोकलैंड लदे ट्राले को पुल पर चढ़ा दिया था। क्षमता से अधिक भार के कारण पुल ट्राला सहित नदी में समा गया था। हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए थे जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुल टूटने से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में 15 गांवों तथा सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की चौकियों का शेष दुनिया से सड़क संपर्क पूरी तरह से कट गया था।

इस पुल से होकर चीन सीमा पर स्थित भारतीय चौकियों पर पहुंचा जा सकता है। बीआरओ ने बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए इस पुल का निर्माण फिर से कर दिया है। शनिवार को बीआरओ ने पुल का शुभारंभ किया। पुल पर पोकलैंड सहित कई वाहनों की आवाजाही कराई गई।

70 मजदूरों ने 6 दिन में तैयार किया 120 फीट लंबा ब्रिज

बैली ब्रिज तैयार होने से सेना और आईटीबीपी के जवानों को चीन सीमा तक पहुंचने में काफी राहत मिलेगी। सैन्य जरूरत का सामान भी आसानी से मिलम तक जा सकेगा। बीआरओ ने 120 फीट लंबे बैली ब्रिज को बनाने के लिए 70 मजदूरों के साथ एक पोकलैंड मशीन का इस्तेमाल किया।

पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी  डॉ. विजय कुमार जोगदण्डे ने बताया कि सेनरगाड़ में क्षतिग्रस्त पुल को तैयार कर लिया गया है। पुल बनने से आपदाकाल में सीमांत के लोगों को राहत पहुंचाने में मदद मिलेगी।

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