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देश के मुस्लिमों में है बेचैनी का अहसास और असुरक्षा की भावना : हामिद अंसारी

निवर्तमान उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी

निवर्तमान उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी                                                                                                                                               (file photo)

नयी दिल्ली। निवर्तमान उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी को अब देश ’स्वीकार्यता का माहौल’ खतरे में लगता है। उनके अनुसार देश के मुस्लिमों में बेचैनी का अहसास और असुरक्षा की भावना है। यह बातें उन्होंने राज्यसभा टीवी पर एक साक्षात्कार के दौरान कहीं। बता दें कि उपराष्ट्रपति के तौर पर 80 साल के अंसारी का दूसरा कार्यकाल गुरुवार को पूरा हो रहा है।

राज्यसभा टीवी पर जाने माने पत्रकार करण थापर को दिए इंटरव्यू में जब अंसारी से पूछा गया कि क्या उन्होंने अपनी चिंताओं से प्रधानमंत्री को अवगत कराया है, इस पर उपराष्ट्रपति ने ’हां’ कहकर जवाब दिया। सरकार की प्रतिक्रिया पूछे जाने पर अंसारी ने कहा, ’यूं तो हमेशा एक स्पष्टीकरण होता है और एक तर्क होता है। अब यह तय करने का मामला है कि आप स्पष्टीकरण स्वीकार करते हैं कि नहीं और आप तर्क स्वीकार करते हैं कि नहीं।’

इंटरव्यू में अंसारी ने भीड़ की ओर से लोगों को पीट-पीटकर मार डालने की घटनाओं, ’घर वापसी’ और तर्कवादियों की हत्याओं का हवाला देते हुए कहा कि यह ’भारतीय मूल्यों का बेहद कमजोर हो जाना, सामान्य तौर पर कानून लागू करा पाने में विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों की योग्यता का चरमरा जाना है और इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात किसी नागरिक की भारतीयता पर सवाल उठाया जाना है।’

यह पूछे जाने पर कि क्या वह इस बात से सहमत हैं कि मुस्लिम समुदाय में एक तरह की शंका है और जिस तरह के बयान उन लोगों के खिलाफ दिए जा रहे हैं, उससे वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं? इस पर अंसारी ने कहा, ’हां, यह आकलन सही है, जो मैं देश के अलग-अलग हलकों से सुनता हूं। मैंने बेंगलुरु में यही बात सुनी। मैंने देश के अन्य हिस्सों में भी यह बात सुनी। मैं इस बारे में उत्तर भारत में ज्यादा सुनता हूं। बेचैनी का अहसास है और असुरक्षा की भावना घर कर रही है।’

यह पूछे जाने पर कि क्या मुस्लिमों को ऐसा लगने लगा है कि वे ’अवांछित’ हैं? इस पर अंसारी ने कहा, ’मैं इतनी दूर नहीं जाऊंगा, असुरक्षा की भावना है।’ ’तीन तलाक ’ के मुद्दे पर अंसारी ने कहा कि यह एक ’सामाजिक विचलन’ है, कोई धार्मिक जरूरत नहीं। धार्मिक जरूरत बिल्कुल स्पष्ट है, इस बारे में कोई दो राय नहीं है लेकिन पितृसत्ता, सामाजिक रीति-रिवाज इसमें घुसकर हालात को ऐसा बना चुके हैं जो अत्यंत अवांछित है।’ उन्होंने कहा कि अदालतों को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए, क्योंकि सुधार समुदाय के भीतर से ही होंगे। कश्मीर मुद्दे पर अंसारी ने कहा कि यह राजनीतिक समस्या है और इसका राजनीतिक समाधान ही होना चाहिए।

 

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