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कश्मीर पर आतंकियों से कोई भी बातचीत सरकार की शर्तों पर ही संभव: सेना प्रमुख

आप ऐसा नहीं कर सकते कि सुरक्षा कर्मियों की हत्या करना जारी रखें और कहें कि हम वार्ता के लिए तैयार हैं। बातचीत तभी हो सकती है जब आप हिंसा छोड़ें।

नई दिल्ली : तालिबान के साथ बातचीत का समर्थन करने के दो दिन बाद थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने फिर दोहराया कि यही रुख जम्मू-कश्मीर में नहीं अपनाया जा सकता। कहाराज्य में आतंकवादी समूहों के साथ कोई भी बातचीत भारत सरकार द्वारा तय शर्तों के आधार पर ही होगी।

जनरल रावत सेना दिवस (15 जनवरी) से पहले आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। तालिबान के साथ वार्ता में कई देशों के शामिल होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को इससे अलग नहीं रहना चाहिए क्योंकि अफगानिस्तान में उसके ‘‘हित’’ हैं। जनरल रावत ने कहा, ‘‘यही रुख जम्मू कश्मीर के लिए लागू नहीं हो सकता। यह हमारे और हमारे पश्चिमी पड़ोसी के बीच एक द्विपक्षीय मुद्दा है। इसमें किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के लिए कोई स्थान नहीं है। यहां हमें बातचीत करनी होगी, हमें बातचीत हमारी शर्तों के आधार पर करनी होगी।’’

गौरतलब है कि जनरल रावत ने बुधवार को ‘रायसीना डायलाग’ में अपने संबोधन में अफगानिस्तान में तालिबान के साथ वार्ता का समर्थन किया था। सेनाध्यक्ष से बुधवार की उनकी टिप्पणी के बारे में सवाल किया गया था जिसमें उन्होंने तालिबान के साथ वार्ता का समर्थन किया था। यह पूछे जाने पर कि क्या वह कश्मीर में हुर्रियत कान्फ्रेंस और अन्य अलगाववादी समूहों के साथ वार्ता का समर्थन करते हैं, उन्होंने कहा,‘‘हम कह रहे हैं वार्ता और आतंकवाद साथ-साथ नहीं हो सकते। यह न केवल हमारे पश्चिमी पड़ोस बल्कि जम्मू-कश्मीर के लिए भी लागू है। आप ऐसा नहीं कर सकते कि सुरक्षा कर्मियों की हत्या करना जारी रखें और कहें कि हम वार्ता के लिए तैयार हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वार्ता तभी हो सकती है जब आप हिंसा छोड़ें।’’

इमरान के आने के बाद भी नहीं सुधरे हालात

जनरल रावत ने कहा कि इमरान खान के पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने के बाद जम्मू-कश्मीर सीमा पर भारत के प्रति पाकिस्तान के आक्रामक व्यवहार में कोई कमी नहीं आई है। पाकिस्तानी नेता शांति की केवल बात कर रहे हैं, जमीन पर स्थिति में सुधार के लिए कुछ भी नहीं कर रहे। कश्मीर में सीमा पार 300 से अधिक आतंकी घुसपैठ की फिराक में हैं लेकिन हमारे जवान उनके प्रयासों को विफल करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार कश्मीर से निपटने के लिए कड़ा और नरम रुख अपना रही है…हम जम्मू कश्मीर में शांति के लिए केवल सहायक है।’’

जनरल बिपिन रावत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सफलता को केवल मारे जाने वाले आतंकवादियों की संख्या से नहीं मापा जा सकता। राज्य के लोगों ने यह समझना शुरू कर दिया है कि हिंसा आगे का रास्ता नहीं है। राज्य में मौजूदा स्थिति पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह नहीं कह रहा कि यह पूरी तरह से नियंत्रण में है।’’

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