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जीएसटी के विरोध में उतरे व्यापारी, इस नए प्रवधान को जोेड़ने पर है आपत्ति

नई दिल्ली। व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी, GST) में धारा 86-बी को जोड़ने पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। धारा 86-बी के तहत जिन व्यापारियों का मासिक टर्नओवर 50 लाख रुपये से ज्यादा है उन्हें एक प्रतिशत जीएसटी नकद जमा कराना पड़ेगा। सरकार ने जाली बिल के जरिए टैक्स चोरी को रोकने के लिए यह उपाय किया है।

कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन को एक पत्र भेजकर मांग की है कि इस नियम को तुरंत स्थगित किया जाए और व्यापारियों से सलाह के बाद ही इसे लागू किया जाए। कैट ने साथ ही मांग की है कि जीएसटी एवं आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तारीख़ 31 दिसंबर 2020 को भी तीन महीने के लिए आगे बढ़ाया जाए। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने सीतारमन को भेजे पत्र में कहा है कि अब समय आ गया है सरकार व्यापारियों के साथ बैठकर जीएसटी कर प्रणाली की समीक्षा करे।  

नए नियम से कारोबार पर पड़ेगा विपरीत असर

दोनों व्यापारी नेताओं ने कहा कि नियम 86 बी देशभर के व्यापारियों के कारोबार पर विपरीत असर डालेगा। कोरोना के कारण कारोबारी पहले से ही त्रस्त हैं और अब ऐसे में यह नया नियम उन पर एक अतिरिक्त बोझ बनेगा। पिछले एक वर्ष से व्यापारियों का पेमेंट चक्र बुरी तरह बिगड़ गया है। लंबे समय तक व्यापारियों द्वारा बेचे गए माल का भुगतान और जीएसटी की रकम महीनों तक नहीं आ रही है। ऐसे में एक प्रतिशत का जीएसटी नकद जमा कराने का नियम उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा जो न्याय संगत नहीं है।  

सभी व्यापारियों को एक ही लाठी से हांकना तर्कसंगत नहीं  

कैट ने कहा कि जीएसटी विभाग के पास फर्जी बिलों के द्वारा जीएसटी लेकर राजस्व को चूना लगाने वाले लोगों के खिलाफ शिकायत हैं तो ऐसे लोगों को क़ानून के मुताबिक़ बहुत सख़्ती से निपटना चाहिए, लेकिन कुछ कथित लोगों की वजह से सभी व्यापारियों को एक ही लाठी से हांकना न तो तर्कसंगत है एवं न ही न्यायसंगत। लिहाजा इस नियम को फिलहाल स्थगित किया जाए।  

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