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जल्द आ रही है दूसरी स्वदेशी कोरोना वैक्सीन, 30 करोड़ डोज खरीदेगी भारत सरकार

नई दिल्ली। देश में कोरोना वैक्सीन की किल्लत के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़े करार को अंतिम रूप दे दिया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने हैदराबाद स्थित वैक्सीन निर्माता कंपनी बायोलॉजिकल-ई से वैक्सीन की 30 करोड़ डोज की डील की है। यह वैक्सीन अगस्त से दिसंबर 2021 के बीच बनाई और स्टोर की जाएगी। भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के बाद यह दूसरी पूर्ण स्वदेशी वैक्सीन होगी। केंद्र सरकार की ओर से कंपनी को इसके लिए 1500 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान किया गया है। इस वैक्‍सीन को दुनिया की सबसे सस्‍ती वैक्‍सीन बताया जा रहा है।

इस वैक्सीन की भी लेनी होंगी 2 डोज

पहले और दूसरे फेज के ट्रायल में पॉजिटिव रिजल्ट दिखने के बाद बायोलॉजिकल-ई अब वैक्सीन के तीसरे फेज का क्लीनिकल ट्रायल कर रही है। यह एक आरबीडी प्रोटीन सब-यूनिट वैक्सीन है। इसमें SARS-CoV-2 के रिसेप्‍टर-बाइंडिंग डोमेन (RBD) के डिमेरिक फॉर्म का ऐंटीजेन की तरह इस्‍तेमाल होता है। वैक्‍सीन की क्षमता बढ़ाने के लिए इसमें एक एडजुवेंट CpG 1018 भी मिलाया गया है। यह वैक्‍सीन दो डोज में उपलब्‍ध होगी। पहली डोज के 28 दिन बाद दूसरी डोज लगेगी।

केंद्र सरकार बायोलॉजिकल-ई की काफी मदद कर रही है। इसकी वजह है कि सरकार ज्यादा से ज्यादा वैक्सीन उत्पादन चाहती है जिससे देश के लोगों को जल्द से जल्द वैक्सीनेट किया जा सके। इसलिए सरकार ने कंपनी को क्लीनिकल ट्रायल के लिए 100 करोड़ रुपये के अलावा अनुसंधान के लिए अन्य मदद मुहैया कराई हैं।

भारत में फिलहाल 3 वैक्सीन और एक पाउडर

भारत में इस समय सीरम सीरम इंस्टीट्यूट की कोवीशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सिन का इस्तेमाल कोरोना वैक्सीनेशन ड्राइव में किया जा रहा है। रूस की स्पुतनिक-वी को भी भारत में इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी गई है। इसके अलावा डीआरडीओ (DRDO) ने कोविड की रोकथाम के लिए 2-DG दवा बनाई है। इसके आपातकालीन इस्तेमाल को भी मंजूरी दे दी गई है। यह एक पाउडर है जिसे पानी में घोलकर दिया जाता है।

मॉडर्ना और फाइजर से भी बात चल रही

इससे पहले बुधवार को मॉडर्ना और फाइजर की कोरोना वैक्सीन को जल्द से जल्द देश में उपलब्ध करवाने के लिए केंद्र सरकार उनकी शर्तें मानने को तैयार हो गई थी। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कहा था कि अगर इन कंपनियों की वैक्सीन को बड़े देशों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिली हुई है तो भारत में इन्हें लॉन्चिंग के बाद ब्रिजिंग ट्रायल की जरूरत नहीं है।

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