आज देवोत्थान एकादशी का पावन दिवस है। मान्यता है कि आज से मांगलिक कार्यों का शुभारंभ किया जाता है।इस पावन अवसर पर देवताओं को जगाने के लिए विशेष पारंपरिक गीत गाए जाते हैं। यहां आप देवउठनी एकादशी के प्रसिद्ध गीत के पूरे बोल पढ़ सकते हैं—उठो देव, बैठो देव।
उठो देव बैठो देव… गीत (Utho Dev Baitho Dev, Dev Uthani Ekadashi Geet)-
उठो देव बैठो देव
पाटकली चटकाओ देव
आषाढ़ में सोए देव
कार्तिक में जागे देव
कोरा कलशा मीठा पानी
उठो देव पियो पानी
हाथ पैर फटकारो देव
आंगुलिया चटकाओ देव
कुवारी के ब्याह कराओ देव
ब्याह के गौने कराओ
तुम पर फूल चढ़ाए देव
घीका दीया जलाये देव
आओ देव पधारो देव
तुमको हम मनाएं देव
चूल्हा पीछे पांच पछीटे
सासू जी बलदाऊ जी धारे रे बेटा
ओने कोने झांझ मंजीरा
सहोदर किशन जी तुम्हारे वीरा
ओने कोने रखे अनार
ये है किशन जी तुम्हारे व्यार
ओने कोने लटकी चाबी
सहोदरा ये है तुम्हारी भाभी
जितनी खूंटी टांगो सूट
उतने इस घर जन्मे पूत
जितनी इस घर सीक सलाई
उतनी इस घर बहुएं आईं
जितनी इस घर ईंट और रोडे
उतने इस घर हाथी-घोड़े
गन्ने का भोग लगाओ देव
सिंघाड़े का भोग लगाओ देव
बेर का भोग लगाओ देव
गाजर का भोग लगाओ देव
गाजर का भोग लगाओं देव
उठो देव उठो देव








