नई दिल्ली: भारत में अब कक्षा 3 से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की पढ़ाई शुरू होने जा रही है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने तीसरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के लिए AI करिकुलम (पाठ्यक्रम) का ड्राफ्ट तैयार कर NCERT को भेज दिया है। अब इस ड्राफ्ट की समीक्षा के लिए एनसीईआरटी ने एक विशेषज्ञ कमेटी गठित की है, जो कोर्स में आवश्यक बदलावों पर विचार कर अंतिम रूप देगी।
🔍 AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग पर फोकस
शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने निर्णय लिया है कि विद्यार्थियों में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और तकनीकी समझ को विकसित करने के लिए एआई की पढ़ाई कक्षा 3 से ही शुरू की जाएगी।
नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप यह कदम भारत को भविष्य की टेक्नोलॉजी के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय शिक्षा बोर्डों के मॉडल का अध्ययन करते हुए कोर्स को भारतीय स्कूली जरूरतों के अनुसार तैयार किया जा रहा है।
🧑🏫 टीचर्स की AI ट्रेनिंग अप्रैल 2026 से पहले पूरी होगी
शिक्षा मंत्रालय ने दिसंबर 2025 तक रिसोर्स मटेरियल, हैंडबुक और डिजिटल कंटेंट तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
जैसे ही एनसीईआरटी अंतिम करिकुलम को मंजूरी देगा, वैसे ही टीचर्स की ट्रेनिंग शुरू की जाएगी ताकि अप्रैल 2026 सेशन से पहले शिक्षक एआई पढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित हो सकें।
🏫 राज्य शिक्षा बोर्डों में भी मिलेगा AI का विकल्प
फिलहाल सीबीएसई के स्कूलों में कक्षा 8 से एआई विषय का विकल्प मौजूद है, लेकिन राज्य बोर्डों में अभी यह सुविधा सीमित है। अब केंद्र सरकार की योजना है कि देश के हर शिक्षा बोर्ड में छात्रों को AI विषय का विकल्प दिया जाए।
2024-25 सत्र में सीबीएसई के 4,538 स्कूलों के करीब 7.9 लाख छात्रों ने 9वीं-10वीं में एआई विषय चुना था, जबकि 944 स्कूलों के 50,343 छात्रों ने इसे सीनियर सेकेंडरी स्तर पर अपनाया।
⚙️ स्कूली शिक्षा में स्किल विषयों को अनिवार्य बनाने की मांग
एनसीईआरटी की रिपोर्ट ‘परख’ के अनुसार, देश के केवल 9.52% स्कूल बोर्डों में ही स्किल सब्जेक्ट अनिवार्य हैं, जबकि 90.48% बोर्डों में ये अभी भी वैकल्पिक हैं।
शिक्षाविदों का कहना है कि समय की मांग के अनुसार स्किल बेस्ड एजुकेशन को अनिवार्य बनाना जरूरी है ताकि छात्र भविष्य की रोजगार आवश्यकताओं के लिए तैयार हो सकें।









