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उत्तर प्रदेशः एससी-एसटी आरक्षण 10 साल बढ़ाने को मंजूरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को अपने विशेष सत्र के दौरान लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण की अवधि को 10 साल के लिए और बढ़ाने का प्रावधान करने वाले एक विधेयक को मंजूरी दे दी। विधानसभा में संक्षिप्त चर्चा के बाद सर्वसम्मति से यह विधेयक पारित किया गया।

राज्य विधानसभा ने मंगलवार को सर्वसम्मति से 126वें संविधान संशोधन विधेयक को स्वीकृति प्रदान की। विधानसभा में संक्षिप्त चर्चा के बाद सर्वसम्मति से यह विधेयक पारित किया गया। इस विधेयक के पारित होने से अनुसूचित जाति एवं जनजाति के आरक्षण की सीमा 10 वर्ष के लिए बढ़ गई है।

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में पिछले 70 सालों से दिए जा रहे अजा, अजजा और एंग्लो-इंडियन के लिए आरक्षण की मीयाद 25 जनवरी  2020 को खत्म होने वाली थी। “मनोनयन” के रूप में एंग्लो-इंडियन के लिए आरक्षण 25 जनवरी को समाप्त होने वाला है। कुछ सदस्यों ने आग्रह किया कि इस मामले को बाद में उठाया जाए।

आरक्षण प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार डॉ. भीमराव अम्बेडकर के सपने को साकार कर रही है। केंद्र सरकार ने बाबा साहेब के नाम पर अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाने के साथ बाबा साहेब के नाम पर भव्य स्मारक बनाया है। भाजपा सरकार ने ही नागपुर और मुंबई में बाबा साहेब के नाम पर भव्य स्मारक बनाया है। देश में सभी तरह से पिछड़े लोगों के लिए आरक्षण है। यहां पर धर्म के आधार पर किसी को आरक्षण नहीं मिलता है। हमारी सरकार ने आरक्षण पर बिना भेदभाव के काम किया है। सभी तरह के लोगों को जोडऩे का काम किया है।

आदित्यनाथ के संबोधन के दौरान विधानसभा में समाजवादी पार्टी के विधायकों ने जमकर हंगामा किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि हंगामा करने वाले लोग गरीबों का हित नहीं चाहते हैं। इसी कारण विपक्षी दल विशेष सत्र में भी काफी हंगामा कर रहे हैं।  

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