लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने विस्थापित बंगाली हिंदू परिवारों के पुनर्वास को लेकर एक महत्वपूर्ण और मानवीय फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मेरठ जिले से जुड़े इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर मेरठ में वर्षों से झील की सरकारी जमीन पर अवैध रूप से रह रहे 99 हिंदू बंगाली परिवारों के स्थायी पुनर्वासन को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली कैबिनेट बैठक में कुल 32 प्रस्तावों में से 30 को मंजूरी मिली, जिसमें यह फैसला प्रमुख रूप से शामिल है।
यह मामला मेरठ जिले की मवाना तहसील के ग्राम नंगला गोसाई से संबंधित है, जहां ये 99 परिवार लंबे समय से झील क्षेत्र में रह रहे थे। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों के संदर्भ में झील की भूमि को मुक्त कराने की आवश्यकता थी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, इन सभी परिवारों को अब कानपुर देहात जिले की रसूलाबाद तहसील में पुनर्वासित किया जाएगा।
प्रत्येक परिवार को आधा एकड़ (0.5 एकड़) भूमि का पट्टा 30 वर्ष के लिए दिया जाएगा, जिसे दो बार नवीनीकरण किया जा सकेगा, यानी कुल 90 वर्ष तक का अधिकार मिलेगा। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, 50 परिवारों को एक स्थान पर और शेष 49 परिवारों को ग्राम ताजपुर तरसौली में 10.530 हेक्टेयर भूमि पर बसाया जाएगा। यह जमीन प्रीमियम या लीज रेंट पर दी जाएगी, ताकि परिवारों को स्थायी और सुरक्षित आवास मिल सके।
सरकार का उद्देश्य इन विस्थापित परिवारों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना और साथ ही पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील झील क्षेत्र को संरक्षित करना है। यह फैसला पूर्वी पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों के प्रति राज्य सरकार की संवेदनशीलता और कल्याणकारी नीति को दर्शाता है।










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