नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने संसद में एक भावुक और सख्त बयान देते हुए विदेश में बसे उन भारतीयों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग की है, जो अपने माता-पिता को भारत में अकेला और तड़पता छोड़कर विदेश में सुख-भोग करते हैं।
11 फरवरी को राज्यसभा में बोलते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा, “मां-बाप को भारत में तड़पता छोड़कर विदेश का आनंद लेने वालों का पासपोर्ट रद्द कर दिया जाए। मां-बाप से उनके बच्चों को लेकर हर 6 महीने पर संतुष्टि-प्रमाण पत्र लिया जाना चाहिए।”
सांसद ने इस मुद्दे को भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ते हुए बताया कि कई माता-पिता अपनी सारी जमा-पूंजी, जमीन-जायदाद बेचकर बच्चों को विदेश पढ़ाई या बसने के लिए भेजते हैं, लेकिन सफल होने के बाद बच्चे माता-पिता से संपर्क कम कर देते हैं या पूरी तरह भूल जाते हैं। उन्होंने पिछले साल के 500 से अधिक ऐसे दुखद मामलों का जिक्र किया, जहां विदेश में बसे बच्चों की लापरवाही के कारण माता-पिता की स्थिति बहुत खराब हो गई और कई मामलों में उनका अंतिम समय अकेले में बीता।
डॉ. अग्रवाल ने सरकार से अपील की कि विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए सख्त नियम बनाए जाएं, जिसमें शामिल हो:
- माता-पिता की देखभाल के लिए आय का एक निश्चित हिस्सा भेजना अनिवार्य किया जाए।
- हफ्ते में कम से कम एक बार फोन पर हालचाल पूछना सुनिश्चित हो।
- हर छह महीने में माता-पिता से हस्ताक्षरित ‘संतुष्टि प्रमाण-पत्र’ (Certificate of Fulfilled Obligation) जमा करना जरूरी हो, अन्यथा पासपोर्ट रद्द करने और भारत वापस बुलाने की कार्रवाई हो।
यह बयान संसद में बजट सत्र के दौरान दिया गया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई लोग इसे बुजुर्गों के प्रति बढ़ती उपेक्षा पर सही कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे व्यावहारिक चुनौतियों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर असर डालने वाला मान रहे हैं।
डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने भावुक अपील में कहा कि बच्चों के पास अधिकारों के साथ कर्तव्य भी होते हैं, और माता-पिता की सेवा राष्ट्र सेवा का हिस्सा है। उन्होंने विदेश मंत्रालय से इस दिशा में नीति बनाने की मांग की है ताकि बुजुर्ग माता-पिता अकेले न छूटें।
यह मुद्दा भारतीय समाज में NRI बच्चों द्वारा माता-पिता की उपेक्षा के बढ़ते मामलों पर नई बहस छेड़ सकता है।










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