-ईमानदार ऑटो चालक ने सुरक्षित हाथों तक पहुंचाईं तमाम मुकदमों की फाइलें
-मददगार बने हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता भानु भूषण जौहरी
बरेली: मुल्क में ईमानदार लोगों की कमी नहीं है. ऐसे लोग तमाम सिरदर्द मोल लेकर भी अपना फर्ज निभाने से पीछे नहीं हटते. इस तरह की एक और मिसाल पेश की है शहर के ऑटो चालक ने. वह अपनी रोजी-रोटी की चिंता छोड़कर फर्ज निभाने के लिए दो दिन तक कसरत तरता रहा और अंतत: उसकी कोशिश कामयाबी में बदल गई.
मंगलवार को शाम के वक्त कचहरी से एक अधिवकता घर जाने के लिए जागन लाल बोध के ऑटो में बैठे. श्यामगंज में उतरते वक्त वह अपनी अटैची ऑटो में ही भूल गये. आगे चलकर जब सभी सवरियां उतर गयीं तो जागन की नजर ऑटो की पिछली सीट पर रखी अटैची पर पड़ी. वह काफी देर तक वहीं खड़ा रहा, लेकिन उस अटैची का कोई दावेदार नहीं आया. थक हारकर वह काशीराम नगर स्थित अपने घर लौट तो आया, लेकिन उसे अटैची मालिक तक पहुंचाने की फिक्र बनी रही.
हाईकोर्ट के वकील का विजिटिंग कार्ड बना सहायक
जागन लाल ने घर जाकर अटैची खोलकर मालिक का पता-ठिकाना या फोन नंबर तलाशने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली. हां एक विजिटिंग कार्ड जरूर मिला, लेकिन वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता भानु भूषण जौहरी का था. जागन लाल ने इन्ही का नंबर मिला दिया तो उसे कामयाबी का रास्ता भी मिल गया.
जागन लाल ने बताया कि जौहरी साहब ने वार्ट्सएप पर अटैची में रखी फाइलों का फोटो मंगवाया. इसी के जरिये अटैची मालिक पता चल गया. यह अटैची सेटेलाइट के पास रहने वाले अधिवक्ता अरुण कुमार सक्सेना की निकली. बुधवार को उसे उन तक सुरक्षित पहुंचा दिया गया.
अटैची में थीं आधा दर्जन मुकदमों की फाइलें
दरअसल अरुण कुमार सकसेना मंगलवार को ऑटो से श्यामगंज तक के लिए बैठे. वहां उतरकर सेटेलाइट जाने के लिए दूसरा ऑटो तलाशने लगे. इसी दरम्यान अटैची छूट गई. उन्होंने बताया कि अटैची में आधा दर्जन से ज्यादा मुकदमों की फाइलें और कुछ अन्य जरूरी कागजात थे. यदि यह न मिलते तो उन्हें बड़ी समस्या पैदा हो जाती. ऑटो चालक जागन लाल को धन्यवाद दिया और इनाम भी दिया.
वकील साहब का कल ही पर्स भी हो गया था चोरी
दुर्भाग्य देखिये, मंगलवार को ही अरुण कुमार सक्सेना का किसी ने पर्स भी उड़ा दिया. पर्स में नकदी के साथ ही एटीएम पेनकार्ड आदि भी थे. पर्स का पता नहीं चल सका है. यह घटना दोपहर के वक्त की बताई गई है.










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