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बैतूल के रेणुका धाम में माता के तीन स्वरूपों के दर्शन की मान्यता, 500 साल पुराना है मंदिर

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छावल गांव की पहाड़ी पर स्थित प्राचीन रेणुका देवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र, नवरात्र में उमड़ते हैं भक्त; प्राकृतिक सुंदरता के बीच धार्मिक पर्यटन की भी अपार संभावनाएं

बैतूल, एजेंसी। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के आमला क्षेत्र के छावल गांव की पहाड़ी पर स्थित प्राचीन माता रेणुका देवी धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। करीब 500 वर्ष पुराने इस मंदिर की विशेष पहचान माता के दिन में तीन बार अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन होने की मान्यता है। पहाड़ी और हरियाली से घिरे इस धार्मिक स्थल पर सालभर श्रद्धालु पहुंचते हैं, जबकि शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान भक्तों की संख्या बढ़ जाती है।

स्वयंभू मानी जाती है माता की प्रतिमा

मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित गणेश गिरी गोस्वामी के अनुसार, मंदिर में स्थापित माता रेणुका देवी की प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, एक ऋषि को स्वप्न में माता के प्राकट्य का संकेत मिला था। इसके बाद इस स्थान पर पूजा-अर्चना शुरू हुई और धीरे-धीरे यह धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।

मंदिर के आसपास खुदाई के दौरान प्राचीन अवशेष और मूर्तियां मिलने की बात भी स्थानीय स्तर पर कही जाती है। हालांकि, इन अवशेषों की ऐतिहासिक प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

सुबह, दोपहर और शाम को तीन स्वरूपों के दर्शन की मान्यता

रेणुका धाम की सबसे खास मान्यता माता के दिन में तीन बार स्वरूप बदलने से जुड़ी है। श्रद्धालुओं के अनुसार, सुबह, दोपहर और शाम को माता के अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन होते हैं। इसी धार्मिक मान्यता के कारण यह मंदिर क्षेत्र के भक्तों के बीच विशेष महत्व रखता है।

भगवान परशुराम की माता से जुड़ा है पौराणिक संबंध

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता रेणुका भगवान परशुराम की माता और महर्षि जमदग्नि की पत्नी थीं। रेणुका देवी से जुड़ी कथाएं भारतीय धार्मिक परंपरा में विशेष स्थान रखती हैं। इसी आस्था और पौराणिक महत्व के कारण मंदिर में दर्शन के लिए दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

नवरात्र में विशेष पूजा-अर्चना, दूर-दूर से पहुंचते हैं भक्त

शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान रेणुका धाम में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान बैतूल, आमला, छिंदवाड़ा और महाराष्ट्र के नागपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक आयोजनों के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल रहता है।

धार्मिक पर्यटन के रूप में उभरने की संभावना

प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा रेणुका देवी धाम धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहाड़ी पर स्थित मंदिर और आसपास का हरित वातावरण श्रद्धालुओं के साथ प्रकृति प्रेमियों को भी आकर्षित कर सकता है। बेहतर प्रचार-प्रसार और आवश्यक सुविधाओं के विकास से यह स्थल बैतूल जिले के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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