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सूफ़ी रईस मियाँ के उर्स में कुल शरीफ़ की रस्म अदा, मुल्क में अमन-चैन और खुशहाली की मांगी दुआ

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बरेली की दरगाह हज़रत नासिर मियाँ में अकीदत के साथ मनाया गया उर्स-ए-सूफ़ी रईस मियाँ, साबरी दस्तरख़्वान पर अकीदतमंदों में बांटा गया लंगर

बरेली। मस्जिद नौमहला शरीफ़ स्थित दरगाह हज़रत नासिर मियाँ (रह.) में उर्स-ए-सूफ़ी रईस मियाँ अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। इस मौके पर कुल शरीफ़ की रूहानी महफ़िल सजाई गई, जिसमें मुल्क की तरक्की, सलामती, अमन-चैन और खुशहाली के लिए ख़ास दुआ मांगी गई। साथ ही बीमारों की शिफा और बेरोज़गारों को रोज़गार मिलने की भी इल्तिजा की गई।

कुरआन की तिलावत से हुआ कार्यक्रम का आगाज़

कार्यक्रम की शुरुआत सोमवार को नमाज़-ए-फ़ज्र के बाद मस्जिद नौमहला शरीफ़ के नायब इमाम मौलाना हसन रज़ा पुरनवी ने कुरआन-ए-पाक की तिलावत से की। इसके बाद सुबह 11 बजे मिलाद-ए-पाक का नज़राना मिलादख्वाह अफसर अली ने पेश किया। इस दौरान उलेमा-ए-कराम ने बुजुर्गों की सादगी, उनकी तालीमात और रूहानी शख्सियत पर रोशनी डालते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने की अपील की।

दोपहर 12:20 बजे सज्जादानशीन अबू हय्यान ख़्वाजा सलमान अहमद नासरी साबरी अल क़ादरी की सरपरस्ती में सूफ़ी रईस मियाँ के कुल शरीफ़ की महफ़िल सजी। नज़्र पेश करने के बाद खुसूसी दुआ की गई, जिसमें मुल्क और आवाम की सलामती, तरक्की, खुशहाली और आपसी भाईचारे के लिए दुआ मांगी गई।

साबरी दस्तरख़्वान पर तकसीम किया गया लंगर

कुल शरीफ़ की रस्म के बाद दरगाह की ओर से साबरी दस्तरख़्वान पर सभी अकीदतमंदों के लिए लंगर का इंतज़ाम किया गया। दरगाह के खादिम सूफ़ी वसीम मियाँ साबरी नासरी ने बताया कि इस मौके पर अकीदतमंदों के बीच लंगर तकसीम किया गया।

लंगर के अवसर पर समाजसेवी और दरगाह प्रवक्ता पम्मी ख़ाँ वारसी ने कहा कि भूखों को खाना खिलाना और जरूरतमंदों की मदद करना सबसे बड़ी इबादत और इंसानियत की सेवा है। उन्होंने कहा कि सूफ़ी-संतों की शिक्षाएं हमेशा आपसी भाईचारे, मोहब्बत और खिदमत-ए-खल्क का पैगाम देती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि साबरी दस्तरख़्वान हर खास-ओ-आम के लिए बिना किसी भेदभाव के खुला रहता है। यह हमारी गंगा-जमुनी तहज़ीब, सामाजिक सौहार्द और आपसी मोहब्बत की खूबसूरत मिसाल है।

बड़ी संख्या में अकीदतमंद रहे मौजूद

उर्स-ए-सूफ़ी रईस मियाँ के मौके पर शाहिद मियाँ कुरैशी साबरी नासरी, सूफ़ी वसीम मियाँ साबरी नासरी, शाहिद रज़ा नूरी, शाने अली कमाल मियाँ साबरी नासरी, समाजसेवी पम्मी ख़ाँ वारसी, आक़िल पहलवान, सलीम साबरी, आसिम हुसैन क़ादरी, दिलशाद साबरी (कल्लन मियाँ), शमशाद साबरी, नईम साबरी, फ़हीम और हसनैन ख़ान समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।

उर्स के दौरान दुआ, मिलाद और लंगर के ज़रिये सूफ़ी परंपरा, इंसानियत की खिदमत और आपसी भाईचारे का संदेश दिया गया।

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