bareillylive@bareillynews:कारगिल विजय दिवस: भारतीय सेना के अदम्य साहस की अमर गाथा, द्रास का युद्ध स्मारक वीरों के बलिदान का साक्षी
ऑपरेशन विजय में भारतीय सेना ने दुर्गम चोटियों पर फिर फहराया तिरंगा, 548 वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान को राष्ट्र ने किया नमन
द्रास (लद्दाख), एजेंसी। कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ के अवसर पर द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक एक बार फिर वीरता, त्याग और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बनकर देशवासियों को शहीदों के अद्वितीय बलिदान की याद दिला रहा है। विशाल तोलोलिंग पहाड़ी की गोद में स्थित यह स्मारक वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की अमर गाथा का जीवंत साक्षी है।
करीब तीन महीने तक चले कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने दुर्गम बर्फीली चोटियों, विषम मौसम और दुश्मन की लगातार गोलीबारी का डटकर सामना किया। अदम्य साहस, रणनीतिक कौशल और अटूट संकल्प के बल पर भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे से कारगिल की सभी महत्वपूर्ण चोटियों को मुक्त कराकर वहां फिर से तिरंगा फहराया। इस अभियान में 548 वीर सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
वर्ष 2004 में राष्ट्र को समर्पित कारगिल युद्ध स्मारक आज शहीद सैनिकों के परिजनों, सेना के जवानों और देशभर से आने वाले पर्यटकों के लिए श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। स्मारक का मुख्य आकर्षण गुलाबी बलुआ पत्थर से निर्मित स्मृति स्तंभ है, जिसके शीर्ष पर उल्टी संगीन लगी है और आधार पर अनवरत जलती ‘अमर ज्योति’ वीर शहीदों के अमर बलिदान की याद दिलाती है। इसके पीछे लहराता तिरंगा और पृष्ठभूमि में तोलोलिंग की पहाड़ियां इस स्थल को और भी गौरवपूर्ण बनाती हैं।
स्मारक की दीवारों पर ‘ऑपरेशन विजय’ और शहीद सैनिकों के बलिदान का इतिहास अंकित है। यहां लेखक माखनलाल चतुर्वेदी की प्रसिद्ध कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ की पंक्तियां भी अंकित हैं, जो देशभक्ति की भावना को और प्रबल करती हैं।
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर भारतीय सेना ने द्रास में दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए हैं। शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में ‘शौर्य संध्या’ का आयोजन हुआ, जबकि रविवार को शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा।
स्मारक परिसर में भारतीय वायुसेना के मिग-21 लड़ाकू विमान को भी प्रदर्शित किया गया है, जिसने ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह विमान स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा और भारतीय वायुसेना के अद्वितीय साहस एवं बलिदान की याद दिलाता है।
कारगिल युद्ध स्मारक आज भी हर भारतीय को यह संदेश देता है कि देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों का बलिदान सदैव अमर रहेगा।






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