किसान नेताओं की रिहाई पर डॉ. रवि नागर का अल्टीमेटम, 3 दिन में रिहाई नहीं हुई तो यूपी के जिला मुख्यालयों पर होगा प्रदर्शन

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किसान आंदोलनकारियों की रिहाई न होने पर जताया रोष, शासन-प्रशासन को दी चेतावनी; 10 प्रतिशत भूखंड, बैकलीज और नए किसान कानून की मांगें भी उठाईं

बरेली। यमुना विकास प्राधिकरण से जुड़ी किसानों की मांगों को लेकर हुए आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए 12 किसान आंदोलनकारियों की अब तक रिहाई नहीं होने पर किसान नेता डॉ. रवि नागर ने कड़ा रोष जताया है। उन्होंने शासन-प्रशासन पर किसानों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। डॉ. रवि नागर ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय के भीतर सभी किसान आंदोलनकारियों को रिहा नहीं किया गया, तो उत्तर प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा।

कुछ किसान नेताओं की रिहाई, 12 आंदोलनकारी अब भी हिरासत में

डॉ. रवि नागर के अनुसार, आंदोलन के दौरान उन्हें, प्रदेश अध्यक्ष पंडित राजेश शर्मा, मंडल अध्यक्ष गौरन लाल गुर्जर, वीरेश भगत और राजेंद्र खलीफा सहित कई किसान नेताओं को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने बताया कि इन नेताओं को रात आठ बजे निजी मुचलकों पर रिहा कर दिया गया, जबकि किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान, किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा सहित 12 किसान आंदोलनकारियों की रिहाई अब तक नहीं हुई है।

डॉ. नागर ने सवाल उठाया कि जब सभी आंदोलनकारियों को रिहा करने पर सहमति बनी थी, तो कुछ लोगों को हिरासत में रखने का क्या औचित्य है? उन्होंने इसे किसानों के साथ दोहरे व्यवहार का मामला बताते हुए प्रशासन से सभी आंदोलनकारियों की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की।

तीन दिन का अल्टीमेटम, जिला मुख्यालयों पर आंदोलन की चेतावनी

किसान नेता डॉ. रवि नागर ने शासन-प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि शेष 12 किसान आंदोलनकारियों को तीन दिन के भीतर रिहा किया जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर किसान विरोध प्रदर्शन करेंगे।

उन्होंने कहा कि किसानों की आवाज को गिरफ्तारियों और पुलिसिया कार्रवाई के जरिए दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसान अपने अधिकारों और जायज मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। अपने साथियों की रिहाई होने तक किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं।

10 प्रतिशत भूखंड और बैकलीज के मुद्दे भी उठाए

डॉ. रवि नागर ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान बातचीत और आपसी सहमति से किया जाना चाहिए, न कि दमनात्मक कार्रवाई के जरिए। उन्होंने किसानों की प्रमुख मांगों का उल्लेख करते हुए 10 प्रतिशत भूखंड, बैकलीज के लंबित मामलों का निस्तारण और किसानों से जुड़े नए कानून को लागू करने की मांग उठाई।

उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को सुनना और उनका उचित समाधान करना सरकार तथा प्रशासन की जिम्मेदारी है। किसानों की जायज मांगों की अनदेखी से असंतोष बढ़ेगा और आंदोलन को मजबूती मिलेगी।

किसानों के सम्मान और अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का ऐलान

डॉ. रवि नागर ने कहा कि सरकार और प्रशासन के पास तीन दिन का समय है। इस अवधि में सभी शेष किसान आंदोलनकारियों की रिहाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर जिला मुख्यालयों पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों के जरिए किसानों का आक्रोश सामने आएगा।

उन्होंने दोहराया कि किसानों के सम्मान, अधिकारों और लोकतांत्रिक आवाज की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। साथ ही, उन्होंने आंदोलनकारियों की रिहाई और किसानों की लंबित मांगों के समाधान को प्राथमिकता देने की मांग की।

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