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बाबा त्रिवटी नाथ मंदिर में पधारे बाबा ‘सोम’ नाथ भक्तों ने दर्शन कर लिया पुण्य लाभ, देखें वीडियो

सोमनाथ मंदिर (गुजरात) भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला और सबसे पवित्र स्थल है। इसका मूल शिवलिंग प्राचीन काल से प्रसिद्ध था, जिसे महमूद गजनवी ने 1026 ई. (सन् 1025-26) में अपने आक्रमण के दौरान तोड़ दिया था।

बरेली (नाथ नगरी) के त्रिवटी नाथ मंदिर परिसर में 6 अप्रैल 2026 को प्राचीन सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के मूल अवशेषों के दर्शन का कार्यक्रम हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। आर्ट ऑफ लिविंग परिवार के मार्गदर्शन में आयोजित इस ऐतिहासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्ति, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और ध्यान के साथ श्रद्धालु इन पावन अवशेषों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर पुण्य लाभ लिया।श्री श्री रविशंकर (आर्ट ऑफ लिविंग) के मार्गदर्शन में इन पावन अवशेषों की देशव्यापी यात्रा चल रही है, जिसमें अमृतसर, बैतूल, बरेली समेत कई जगहों पर दर्शन हुए।

नाथनगरी पहुंचीं प्राचीन सोमनाथ शिवलिंग अवशेष यात्रा, त्रिबटीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं ने किये दर्शन – YouTubehttps://www.youtube.com/watch?v=Y4EG-mTWCLY

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • मूल शिवलिंग की विशेषता: किंवदंतियों और ऐतिहासिक वर्णनों के अनुसार, मूल ज्योतिर्लिंग लगभग 3 फीट ऊंचा था और जमीन से करीब 2 फीट ऊपर हवा में तैरता (levitate) हुआ दिखाई देता था। इसे चुंबकीय या वैज्ञानिक तकनीक (जैसे चुंबक या अन्य सामग्री) से संभव बताया जाता है।
  • गजनवी के हमले में मंदिर को भारी नुकसान पहुंचा, शिवलिंग खंडित हो गया। कुछ पुजारियों (विशेषकर अग्निहोत्री ब्राह्मण परिवार) ने इसके टुकड़ों को गुप्त रूप से संरक्षित कर लिया और पीढ़ी दर पीढ़ी पूजा करते रहे।

खोज और अवशेष

महमूद गजनवी के 1026 ई. के आक्रमण में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था।एक अग्निहोत्री ब्राह्मण परिवार (जैसे सीताराम शास्त्री) ने इन्हें संभाल रखा था। अग्निहोत्री ब्राह्मण परिवार की पीढ़ियों ने इन टुकड़ों (करीब 11 टुकड़े) को गुप्त रूप से संरक्षित रखा। 1924 में कांची शंकराचार्य के निर्देश पर इन्हें 100 वर्षों तक गुप्त रखा गया।कांची शंकराचार्य की भविष्यवाणी के अनुसार, जनवरी 2025 (महाशिवरात्रि के आसपास) में इन अवशेषों को श्री श्री रविशंकर जी को सौंप दिया गया। श्री श्री रविशंकर (आर्ट ऑफ लिविंग) के मार्गदर्शन में इन अवशेषों की यात्रा देशभर में हो रही है (अमृतसर, बैतूल, बरेली आदि जगहों पर दर्शन हुए)। इन्हें सोमनाथ मंदिर में पुनः प्रतिष्ठित करने की योजना है।अब इन्हें सोमनाथ मंदिर (गुजरात) में पुनः प्रतिष्ठित (पुनर्स्थापना) करने की योजना है, ताकि लाखों श्रद्धालु इनके आशीर्वाद से लाभान्वित हो सकें।

वैज्ञानिक पहलू: अवशेषों का विश्लेषण (GSI रिपोर्ट) में बेरियम-मैग्नीशियम (लगभग 78%) और आयरन (2%) पाया गया, जिसमें केंद्र में मजबूत चुंबकीय बल है।

मंदिर के अवशेष और संग्रहालय

सोमनाथ मंदिर कई बार (करीब 17 बार) ध्वस्त हुआ और पुनर्निर्मित हुआ। अंतिम पुनर्निर्माण 1951 में हुआ। पुराने मंदिर के खंडहरों के कुछ हिस्से अब प्रभास पटन (सोमनाथ) के संग्रहालय में संरक्षित हैं। पुरातात्विक खुदाई में 9वीं-10वीं शताब्दी के मंदिर के आधार, नक्काशीदार पत्थर और अन्य अवशेष मिले हैं।

ऐतिहासिक तस्वीरें (1869-1895 के आसपास के खंडहर)

प्राचीन सोमनाथ मंदिर (गुजरात) के खंडहर दिखाते हैं कि मंदिर कितना भव्य रहा होगा।

वर्तमान स्थिति

  • वर्तमान शिवलिंग: 1951 के बाद बने मंदिर में नया शिवलिंग स्थापित है, जो तैरता नहीं है।
  • प्राचीन अवशेष अब यात्रा पर हैं या पुनर्स्थापना की प्रक्रिया में। ये हिंदू आस्था, इतिहास और लचीलापन का प्रतीक हैं।

ये अवशेष सोमनाथ की प्राचीन महिमा, आक्रमणों के बावजूद जीवित रहने वाली परंपरा और सनातन संस्कृति की निरंतरता को दर्शाते हैं।

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