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आजादी के 72 साल बाद भी नहीं पहुंची गांव में बिजली लेकिन पहुंच गया BILL

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नयी दिल्ली। बलरामपुर जिले का एक ऐसा गांव जहां आजादी के 72 साल बाद भी बिजली नहीं पहुंच पाई है लेकिन बिजली का बिल पहुंच गया है। ग्रामीण लालटेन और ढिबरी के सहारे ही जीवन यापन करने पर मजबूर है। ये गांव भाजपा शासन काल में मंत्री रहे और वर्तमान में राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम का है, वहीं जिले के कलेक्टर गांव में जल्द ही बिजली व्यवस्था की बात कह रहे हैं। बलरामपुर जिले का सनावल गांव के पतेरी पारा जहां करीब 40 घर ऐसे है जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। गांव की बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि हम लोग अभी तक लाइट नहीं देखे हैं और रात में लालटेन और ढिबरी के सहारे ही खाना बनाते हैं जिससे उनको काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा। महिलाओं का कहना है लालटेन और ढिबरी जलाने के लिए मिट्टी का तेल भी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है।
पतेरी पारा के ग्रामीणों का कहना है कि यहां से राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम का घर महज एक किलोमीटर की दूरी पर है लेकिन बिजली के लिए आज तक सिर्फ आश्वासन ही मिल पाया है।
अब प्रदेश में नई सरकार बनी है तो घरों में बिजली तो नहीं पहुंची लेकिन बिजली का बिल पहुंच गया है। सनावल गांव के सरपंच ने बताया कि गांव में बिजली नहीं होने के कारण स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को लालटेन और ढिबरी में ही अपनी पढ़ाई करनी पड़ती है।
ग्रामीणों को अंधेरे में ही गुजर बसर करना पड़ रहा है। विभाग की लापरवाही से गांव में बिजली सप्लाई के बिना ही बिजली का बिल भेज दिया गया है। वहीं इस मामले में क्षेत्रीय विधायक ने रामविचार नेताम के ऊपर आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि रामविचार नेताम ने अधिकारियों के ऊपर दवाव बनाकर बिजली के सारे खंबे अपने मोहल्ले में लगवा दिए थे।
इस मामले में जिले के कलेक्टर ने कहा कि जिले में जहां भी बिजली नहीं पहुंच पाई हैं, वहां का सर्वे करवा लिया गया।
बरसात के बाद सभी जगह बिजली लगने का काम शुरू कर दिया जाएगा। सनावल में बिना बिजली के बिल आने पर कलेक्टर ने इसको विभाग की चूक बताते हुए इसको ठीक करने की बात कह रहे हैं।

ज़ी साभार

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