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Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को लगेगा चंद्र ग्रहण,जानें सूतक काल

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नई दिल्ली: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) 3 मार्च को लगने वाला है। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) होगा, जिसे अंग्रेजी में ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है, क्योंकि इस दौरान चंद्रमा लाल-भूरे रंग का दिखाई देता है। यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा। संयोग से इसी दिन होली का त्योहार भी है, और शाम को कई जगहों पर होलिका दहन होगा, जिससे इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, हालांकि पूर्णता की अवधि मुख्य रूप से शाम को चंद्रोदय के समय ही नजर आएगी। अधिकांश भारतीय शहरों में चंद्रमा ग्रहण की आंशिक अवस्था में उदय होगा, जबकि पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में पूर्ण ग्रहण बेहतर दिख सकता है।

चंद्र ग्रहण के प्रमुख समय (भारतीय समयानुसार – IST)

भारत में ग्रहण के समय इस प्रकार हैं

  • पेनम्ब्रल चरण शुरू: दोपहर लगभग 2:14 PM से 3:20 PM IST
  • पूर्ण छाया (Umbral) शुरू: लगभग 3:20 PM से 4:58 PM IST
  • पूर्णता (Totality) की शुरुआत: लगभग 4:58 PM IST
  • अधिकतम ग्रहण: लगभग 5:25 PM से 6:33 PM IST के आसपास
  • पूर्णता समाप्त: लगभग 5:32 PM से 6:33 PM IST
  • ग्रहण समाप्ति: शाम लगभग 6:47 PM IST तक

भारत में चंद्रोदय शाम 6:26 PM के आसपास होगा, इसलिए ज्यादातर लोग ग्रहण की आंशिक या अंतिम अवस्था (लगभग 20-30 मिनट) ही देख पाएंगे, जब चंद्रमा लाल दिखेगा। पूर्ण ग्रहण की कुल अवधि वैश्विक रूप से 58 मिनट तक है, लेकिन भारत में यह सीमित दिखेगा।

सूतक काल कब शुरू होगा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस दौरान शुभ-मांगलिक कार्य, पूजा-पाठ, भोजन आदि वर्जित रहते हैं।

  • सूतक काल शुरू: 3 मार्च सुबह 6:20 AM से 6:23 AM IST
  • सूतक समाप्त: ग्रहण समाप्त होने के बाद, शाम 6:47 PM IST के बाद

इस दौरान गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानियां बरती जाती हैं। सूतक में मंदिरों में पूजा प्रतिबंधित रह सकती है, और लोग घर पर रहकर जप-तप कर सकते हैं।

धार्मिक महत्व और सावधानियां

  • चंद्र ग्रहण को हिंदू धर्म में अशुभ माना जाता है, इसलिए सूतक काल में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे कार्य टालें।
  • ग्रहण के दौरान दान-पुण्य, मंत्र जाप और ध्यान करना शुभ माना जाता है।
  • वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जहां पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, और वायुमंडल से अपवर्तित लाल प्रकाश चंद्रमा को ‘ब्लड मून’ बनाता है।

मौसम साफ रहने पर इसे नंगी आंखों से देखा जा सकता है—कोई विशेष चश्मे की जरूरत नहीं। पूर्वोत्तर भारत (जैसे गुवाहाटी, इटानगर) में बेहतर दृश्य मिल सकता है।

यह ग्रहण 2026 का पहला और महत्वपूर्ण खगोलीय आयोजन है। आकाश की इस खूबसूरती का आनंद लें और धार्मिक रीतियों का पालन करें!

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