पत्रकारिता में एआई के बढ़ते प्रभाव पर मंथन, बरेली के 10 पत्रकारों को मिला ‘पत्रकारिता मार्तण्ड’ सम्मान

bareillylive@पत्रकारिता में एआई के बढ़ते प्रभाव पर मंथन

अखिल भारतीय साहित्य परिषद की गोष्ठी में विशेषज्ञों ने एआई के अवसरों और चुनौतियों पर रखे विचार, डीपफेक के खतरों से किया आगाह

बरेली@bareillylive:बरेली। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पत्रकारिता के क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रही है। समाचारों के विश्लेषण, तथ्यों के संकलन और प्रस्तुतीकरण में इसकी उपयोगिता लगातार बढ़ रही है, लेकिन पत्रकारिता की विश्वसनीयता और संवेदनशीलता बनाए रखने के लिए मानवीय विवेक एवं नियंत्रण आवश्यक है। यह विचार अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से आयोजित ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं पत्रकारिता’ विषयक विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किए। इस अवसर पर बरेली के दस वरिष्ठ पत्रकारों को ‘पत्रकारिता मार्तण्ड’ और साहित्यिक क्षेत्र की नौ विभूतियों को ‘साहित्य मार्तण्ड’ सम्मान से अलंकृत किया गया।

प्रभात नगर स्थित वरिष्ठ साहित्यकार निरुपमा अग्रवाल के आवास पर आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. सुरेश बाबू मिश्रा ने की। अमृत विचार के फीचर संपादक कुमार रहमान मुख्य अतिथि रहे, जबकि फिजिशियन डॉ. शरद अग्रवाल और सर्जन डॉ. विपिन वार्ष्णेय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मोहन चंद्र पांडेय की सरस्वती वंदना और उमेश चंद्र गुप्ता के अभिनंदन गीत से हुआ।

पत्रकारिता में एआई उपयोगी, लेकिन मानवीय नियंत्रण जरूरी : कुमार रहमान

मुख्य अतिथि कुमार रहमान ने कहा कि बदलते तकनीकी दौर में पत्रकारिता के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग महत्वपूर्ण हो गया है। सटीक विश्लेषण, आंकड़ों के संकलन, समाचारों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण और नए तथ्यों की खोज में एआई उपयोगी साबित हो रही है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक पर मानवीय नियंत्रण बनाए रखना अनिवार्य है, ताकि समाचारों की सत्यता और विश्वसनीयता प्रभावित न हो।

अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. सुरेश बाबू मिश्रा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने न्यूजरूम से लेकर वार रूम तक कामकाज के तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव किया है। क्रिकेट विश्व कप, फीफा, ओलंपिक और एशियाई खेलों के प्रसारण में एआई आधारित तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है। युद्ध, बाढ़, भूकंप और बर्फीले तूफान जैसी घटनाओं के दृश्यात्मक प्रस्तुतीकरण में भी आधुनिक तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने तकनीक के विवेकपूर्ण और जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया।

एआई पत्रकार की संवेदनशीलता का विकल्प नहीं : संजीव गंभीर

वरिष्ठ पत्रकार संजीव गंभीर ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता सूचनाओं का विश्लेषण और प्रस्तुतीकरण तो कर सकती है, लेकिन किसी घटना से जुड़ी मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक परिस्थितियों और वास्तविक अनुभवों को एक पत्रकार की तरह समझना उसके लिए चुनौतीपूर्ण है। निष्पक्ष और तथ्यपरक समाचारों के लिए पत्रकारों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

वरिष्ठ पत्रकार निर्भय सक्सेना ने डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भ्रामक वीडियो, तस्वीरें और फर्जी सूचनाएं सामाजिक समरसता के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। ऐसे में पत्रकारों को तकनीकी रूप से जागरूक रहते हुए तथ्यों की पुष्टि को प्राथमिकता देनी चाहिए।

चिकित्सा क्षेत्र में भी बढ़ रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका

विशिष्ट अतिथि डॉ. शरद अग्रवाल ने चिकित्सा विज्ञान में एआई के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जटिल रोगों की पहचान, उपचार संबंधी विश्लेषण और नई औषधियों की खोज में यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

डॉ. विपिन वार्ष्णेय ने कहा कि आधुनिक सर्जरी में एआई आधारित तकनीकों के उपयोग से चिकित्सकों को अधिक सटीकता के साथ कार्य करने में सहायता मिल रही है। उन्होंने न्यूनतम चीर-फाड़ वाली शल्य चिकित्सा सहित आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में तकनीकी प्रगति का उल्लेख किया।

इन दस पत्रकारों को मिला ‘पत्रकारिता मार्तण्ड’ सम्मान

समारोह में पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान के लिए कुमार रहमान, संजीव गंभीर, निर्भय सक्सेना, सचिन श्याम भारतीय, अशोक कुमार गुप्ता, विवेक मिश्रा, हसीन दानिश, अंशुल कुमार, प्रवीण शर्मा और अनुराग उपाध्याय को ‘पत्रकारिता मार्तण्ड’ सम्मान प्रदान किया गया।

डॉ. सुरेश बाबू मिश्रा, डॉ. शरद अग्रवाल, डॉ. विपिन वार्ष्णेय और निरुपमा अग्रवाल ने सम्मानित पत्रकारों का माल्यार्पण किया, पटका ओढ़ाया और सम्मान पत्र भेंट किए।

नौ साहित्यिक विभूतियां ‘साहित्य मार्तण्ड’ सम्मान से अलंकृत

साहित्यिक क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. शरद अग्रवाल, डॉ. विपिन वार्ष्णेय, निरुपमा अग्रवाल, प्रोफेसर विनीता सिंह, डॉ. चंद्र प्रकाश शर्मा, उमेश चंद्र गुप्ता, विमलेश चंद्र दीक्षित, मोहन चंद्र पांडेय और संजीव शंखधार को ‘साहित्य मार्तण्ड’ सम्मान से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर विनीता सिंह ने किया। अंत में परिषद के जनपदीय मंत्री विमलेश चंद्र दीक्षित ने अतिथियों, वक्ताओं और उपस्थित साहित्यकारों एवं पत्रकारों का आभार व्यक्त किया।

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