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बरेली कॉलेज ने श्रम विभाग के आदेश को दिया ठंडा जवाब

बरेली कॉलेज ने श्रम विभाग के आदेश को दिया ठंडा जवाब

बरेली सहायक श्रमायुक्त बोले- डीएम को भेजेंगे रिपोर्ट, कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन और विनियमितीकरण की मांग उठाई

बरेली@bareillylive:बरेली। बरेली कॉलेज के अस्थायी कर्मचारियों और कॉलेज प्रबंधन के बीच सहायक श्रमायुक्त कार्यालय में प्रस्तावित वार्ता मंगलवार को हुई। हालांकि, कॉलेज प्रबंधन की ओर से दिए गए लिखित जवाब से कर्मचारियों को निराशा हाथ लगी। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि अस्थायी कर्मचारियों को निजी स्रोतों से वेतन दिया जाता है और कॉलेज को कोई अनुदान प्राप्त नहीं होता। ऐसे में कर्मचारियों पर संबंधित श्रम नियम लागू नहीं होते।

वार्ता के लिए कर्मचारी करीब दो घंटे तक सहायक श्रमायुक्त कार्यालय में इंतजार करते रहे। इसके बाद सहायक श्रमायुक्त बालगोविंद के पहुंचने पर कॉलेज प्रबंधन का लिखित जवाब पढ़कर सुनाया गया। कर्मचारियों की ओर से रखी गई मांगों और कॉलेज के जवाब पर चर्चा के बाद सहायक श्रमायुक्त ने प्रबंधन के रुख को श्रम कानूनों के अनुरूप नहीं माना। उन्होंने कहा कि पूरे मामले से जिलाधिकारी को अवगत कराते हुए रिपोर्ट भेजी जाएगी।

डीएम से मिलेंगे कर्मचारी

कर्मचारी कल्याण सेवा समिति के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि कर्मचारी अब जिलाधिकारी से मुलाकात कर अपनी समस्याएं और मांगें रखेंगे। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन का भुगतान और लंबे समय से कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों का विनियमितीकरण अथवा समायोजन शामिल है।

25 सितंबर को शासन को देंगे ज्ञापन

समिति पदाधिकारियों ने बताया कि मांगों को शासन तक पहुंचाने के लिए 25 सितंबर को लखनऊ जाने की तैयारी है। वहां शासन को ज्ञापन देकर न्यूनतम वेतन और कर्मचारियों के विनियमितीकरण/समायोजन की मांग उठाई जाएगी।

प्रबंधन समिति सचिव को हटाने की मांग

समिति के सचिव हरीश मौर्य ने बरेली कॉलेज प्रबंधन समिति के सचिव को हटाने की मांग भी उठाई। उनका आरोप है कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान को लेकर प्रबंधन की ओर से सकारात्मक पहल नहीं की जा रही है।

पार्किंग व्यवस्था का मुद्दा भी उठा

बैठक के दौरान कर्मचारियों ने कॉलेज में पार्किंग व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। कर्मचारियों ने मांग की कि 18 सितंबर तक पार्किंग से जुड़ी समस्या का समाधान कराया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान नहीं हुआ तो वे आगे भी आंदोलनात्मक कदम उठाने को मजबूर होंगे।

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