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दरगाह ताजुश्शरिया पर जिलानी मियां और हामिद मियां का कुल शरीफ, उर्स-ए-रज़वी में देश-विदेश से पहुंचने लगे जायरीन

bareillylive@bareillynews:हुज्जतुल इस्लाम इस्लाम की हक्कानियत की मजबूत दलील थे: मुफ्ती शाहजाद आलम

बरेली। इमाम अहमद रज़ा खां फाज़िले बरेलवी (आला हज़रत) के 108वें उर्स-ए-रज़वी के तहत गुरुवार को दरगाह ताजुश्शरिया पर इब्राहिम रज़ा खां (जिलानी मियां) और हुज्जतुल इस्लाम हामिद रज़ा खां (हामिद मियां) का कुल शरीफ अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। उर्स की सभी रस्में दरगाह ताजुश्शरिया के सज्जादानशीन काज़ी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती मुहम्मद असजद रज़ा खां कादरी (असजद मियां) की सरपरस्ती में, जमात रज़ा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उर्स प्रभारी सलमान मियां की सदारत तथा राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां की निगरानी में संपन्न हुईं।

जमात रज़ा के प्रवक्ता समरान खान ने बताया कि फज्र की नमाज़ के बाद दरगाह पर कुरआनख्वानी और नात-ओ-मनकबत की महफिल आयोजित हुई। सुबह 7:10 बजे जिलानी मियां के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। दिनभर दरगाह आला हज़रत और दरगाह ताजुश्शरिया पर जायरीनों की हाजिरी, गुलपोशी और फातिहा का सिलसिला जारी रहा।

मगरिब की नमाज़ के बाद मिलाद-ए-मुस्तफा की महफिल सजी, जबकि मुख्य कार्यक्रम का शुभारंभ इशा की नमाज़ के बाद कारी वसीम रज़वी की तिलावत-ए-कुरआन से हुआ। सैय्यद कैफ़ी अली और नाईम रज़ा तहसीनी ने नात-ओ-मनकबत पेश की। देश-विदेश से आए उलमा-ए-किराम ने जिलानी मियां और हुज्जतुल इस्लाम की धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक सेवाओं पर प्रकाश डाला।

अपने संबोधन में मुफ्ती शाहजाद आलम ने कहा कि हुज्जतुल इस्लाम इस्लाम की हक्कानियत की मजबूत दलील थे। उन्होंने अरबी भाषा और इस्लामी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा अपने वालिद आला हज़रत के साथ देश और समाज की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुफ्ती नश्तर फारूकी ने कहा कि इल्म इंसान की सबसे बड़ी दौलत है और पढ़ना-पढ़ाना सबसे श्रेष्ठ कार्य है, जिसे हुज्जतुल इस्लाम ने पूरी जिंदगी निभाया। इस अवसर पर अल्लामा अब्दुल मुस्तफा रादोल्वी, मुफ्ती आशिक हुसैन, मौलाना शकील, मुफ्ती अफजल सहित अन्य उलमा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

रात्रि 10:35 बजे हुज्जतुल इस्लाम हामिद मियां के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। फातिहा कारी शर्फोद्दीन और मौलाना अब्दुल सत्तार ने पढ़ी, जबकि मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआ काज़ी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद मियां ने कराई। कार्यक्रम का संचालन मौलाना गुलजार ने किया।

देश-विदेश से पहुंचने लगे लाखों जायरीन

जमात रज़ा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां ने बताया कि 108वें उर्स-ए-रज़वी में देश-विदेश से बड़ी संख्या में अकीदतमंद बरेली पहुंच रहे हैं। उत्तर प्रदेश के अलावा ओडिशा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, केरल, कर्नाटक, दिल्ली, पंजाब, आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित श्रीलंका, सऊदी अरब, मॉरीशस, तुर्की, दक्षिण अफ्रीका और दुबई से भी जायरीन उर्स में शामिल होने के लिए पहुंच चुके हैं।

सिटी स्टेशन से उर्स स्थल तक दो दिन चलेगी निशुल्क बस सेवा

फरमान मियां ने बताया कि जायरीनों की सुविधा के लिए 7 और 8 अगस्त को सिटी स्टेशन से मदरसा जामियातुर्रज़ा (उर्स स्थल) तक 24 घंटे निशुल्क बस सेवा संचालित की जाएगी। यह सेवा 8 अगस्त की रात 8 बजे तक उपलब्ध रहेगी।

आज के प्रमुख कार्यक्रम

प्रवक्ता समरान खान ने बताया कि शुक्रवार, 7 अगस्त को फज्र की नमाज़ के बाद कुरआनख्वानी होगी। दोपहर 2 बजे काज़ी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद मियां हामिदी मस्जिद में जुमे की नमाज़ अदा कराएंगे। असर की नमाज़ के बाद नात-ओ-मनकबत की महफिल होगी तथा शाम 7:14 बजे हुजूर ताजुश्शरिया का कुल शरीफ अदा किया जाएगा। इशा की नमाज़ के बाद इमाम अहमद रज़ा कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी, जिसमें देश-विदेश से आए उलमा-ए-किराम और सज्जादगान अपने विचार रखेंगे। देर रात उर्स की अन्य निर्धारित रस्में भी अदा की जाएंगी।

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