गाजियाबाद के एक्स-मुस्लिम यूट्यूबर सलीम वास्तिक, जो मजहबी कट्टरता के खिलाफ मुखर आवाज उठाने के लिए जाने जाते हैं, करीब एक महीने के अस्पताल इलाज के बाद रविवार (30 मार्च 2026) को अपने घर लौट आए। उनके घर वापसी की खबर से समर्थकों और स्थानीय लोगों में राहत की लहर दौड़ गई।
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हालांकि, 27 फरवरी को लोनी थाना क्षेत्र की निठौरा रोड स्थित अली गार्डन कॉलोनी में उनके कार्यालय पर हुए खौफनाक हमले में गले पर गहरी चोट लगने के कारण वह अभी बोलने में असमर्थ हैं। डॉक्टरों ने बताया कि पूरी रिकवरी में समय लगेगा और विशेष देखभाल की जरूरत है।
हमले में हेलमेट पहने दो सगे भाई जीशान और गुलफाम ने सर्जिकल ब्लेड से उनका गला रेत दिया और कांच के टुकड़ों से कमर व पेट पर ताबड़तोड़ वार किए। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां लंबे इलाज के बाद उनकी स्थिति सुधरी।
पुलिस ने मामले की तेज कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को अलग-अलग मुठभेड़ में मार गिराया था। एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि सलीम वास्तिक की सुरक्षा को लेकर पूरी सतर्कता बरती जा रही है। घर लौटते ही उनकी सुरक्षा में दो सशस्त्र गनर तैनात कर दिए गए हैं, जबकि स्थानीय पुलिस लगातार निगरानी रखे हुए है। खुफिया एजेंसियां भी स्थिति पर नजर रख रही हैं ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
सलीम वास्तिक की नई वीडियो में वह मौत को मात देकर लौटे दिख रहे हैं और कह रहे हैं- ‘मैं डरा नहीं’। उनके समर्थक लिख रहे हैं- “जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई।”
यह मामला मजहबी कट्टरता और अभिव्यक्ति की आजादी पर फिर से सवाल खड़ा करता है। सलीम वास्तिक की बहादुरी और पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है।










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