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हरियाली तीज 2006: सुहाग, सौभाग्य और संस्कृति का उत्सव

हरियाली तीज हिंदू धर्म का एक प्रमुख और लोकप्रिय त्योहार है, जिसे विशेष रूप से महिलाओं द्वारा उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। सावन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति की हरियाली, प्रेम, सौभाग्य और दांपत्य जीवन की मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त को मनाई जाएगी।

कब है हरियाली तीज 
हरियाली तीज का व्रत सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक इस साल सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 14 अगस्त 2026 को शाम 6 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 15 अगस्त 2026 को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के आधार हरियाली तीज का पर्व 15 अगस्त को मनाया जाएगा।

हरियाली तीज पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त :ब्रह्रा मुहूर्त 15 अगस्त को सुबह 4 बजकर 50 मिनट से लेकर सुबह 5 बजकर 35 मिनट तक है।
अभिजीत मुहूर्त का समय दोपहर 12 बजकर 17 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर08 मिनट तक रहेगा ।
विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। 
गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 06 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।
अमृत काल रात 8 बजकर 18 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

हरियाली तीज की विशेष परंपराएँ

हरियाली तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसी पौराणिक प्रसंग की स्मृति में सुहागिन महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से तीज का व्रत रखती हैं। अविवाहित कन्याएँ भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से यह व्रत करती हैं।

इस पर्व पर महिलाएँ विशेष रूप से हरे रंग के वस्त्र और चूड़ियाँ पहनती हैं। हाथों में मेहंदी लगाई जाती है और महिलाएँ झूले झूलते हुए तीज के लोकगीत गाती हैं। घरों में पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं तथा माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है। कई स्थानों पर महिलाएँ सामूहिक रूप से तीज उत्सव आयोजित करती हैं, जिससे आपसी प्रेम और भाईचारा बढ़ता है।

हरियाली तीज का प्राकृतिक महत्व भी बहुत सुंदर है। सावन में वर्षा के कारण चारों ओर पेड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं। इसलिए यह पर्व प्रकृति के सौंदर्य और पर्यावरण के प्रति प्रेम का संदेश भी देता है। झूले, लोकगीत और हरियाली इस त्योहार को भारतीय लोकसंस्कृति से गहराई से जोड़ते हैं।

आज के आधुनिक समय में भी हरियाली तीज की परंपरा और महत्व कायम है। यह त्योहार हमें भारतीय संस्कृति, पारिवारिक संबंधों, प्रकृति और आस्था से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है। हरियाली तीज केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, सौंदर्य, उमंग और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है।

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